- शिकारियों ने बिछाया था तार
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पन्ना जिले में लगातार बाघों के शिकार की घटनाओं में बढोत्तरी हो रही है एक माह के अंदर फिर एक बाघ की करंट लगने से मौत हो गई है। इससे पहले विगत माह 6 दिसंबर 2022 को उत्तर वन मंडल क्षेत्र के विक्रमपुर बीट में फांसी के फंदे में फंस जाने से एक युवा बाघ की मौत हो गई थी। बुधवार को एक बाघ एवं एक हायना की मौत पन्ना टाइगर के अंतर्गत किशुनगढ़ रेंज के अंतर्गत हो गई।
फील्ड डायरेक्टर पन्ना टाईगर रिजर्व द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार उक्त घटना पन्ना टाइगर रिजर्व के किशुनगढ़ रेंज अंतर्गत बसुधा बीट के कक्ष क्रमांक 521 की बताई जा रही है, बाघ की उम्र लगभग 2 वर्ष बताई गई है। बताया गया है कि जंगल में शिकारियों के द्वारा सुअर या अन्य जानवरों के शिकार के लिए विद्युत तार बिछाया गया था। बुधवार को जिसकी चपेट में बाघ और हायना के आने से दोनो की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। जानकारी मिलते ही फील्ड डारेक्टर बृजेंद्र झा एवं वन्य जीव विशेषज्ञ डॉक्टर संजीव गुप्ता मौके पर पहुंचे और बाघ एवं हायना के शव को बरामद कर पोस्टमार्टम उपरांत अंतिम संस्कार किया गया। करंट फैलाने वाले आरोपितों तक पहुंचने के लिए डॉग स्कॉयड टीम बुलाकर जांच की जा रही है।
बाघों के कुनबे में बढ़ोत्तरी के साथ मौतों का सिलसिला चिंताजनक
बाघा पुनर्स्थापना के बाद से लगातार बाघों की संख्या बढ़ती जा रही है। वर्तमान में लगभग 70 से भी अधिक बाघ पन्ना टाईगर रिजर्व में हैं, लेकिन लगातार उनकी मौतों का सिलसिला जारी होने से चिंता का विषय बन गया है। दो वर्ष के अंदर लगभग चार बाघों की मौत हो चुकी है जिसमें दो बाघों की हाल ही में 6 दिसंबर एवं 4 जनवरी को हुई तथा इसके लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व युवा बाघ की मौत हुई थी और दो वर्ष के अंदर ही चित्रकूट के मंझगंवा जिला सतना में बाघ का शिकर कर गायब करने की कोशिश की गई थी और एक बाघ सिंहपुर जिला सतना मे मारा गया था। इस प्रकार से न पन्ना टाईगर रिजर्व में बाघ सुरक्षित हैं और जो बाघ पन्ना जिले से बाहर गया वह कभी लौटकर जिंदा वापस नहीं आया।