एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा आईफोन मेकर बनने की राह पर चल पड़ा है। अमेरिकी स्मार्टफोन दिग्गज एप्पल चीन के बाहर प्रोडक्शन यूनिट्स में विविधता लाने का विचार कर रहा है। उद्योग के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक स्थानीय रूप से निर्मित आईफोन निर्माण में भारत की हिस्सेदार सबसे ज्यादा होने की संभावना है।
सरकार की 41,000 करोड़ रुपये की उत्पादन से जुड़ी पीएलआई स्किम का लाभ फॉक्सकॉन, पेगाट्रॉन और विस्ट्रॉन को मिल रहा है, जिसकी वजह से भारत में आईफोन की मैन्युफैक्चरिंग तेजी से बढ़ना तय है।
चीन और अमेरिका की जियो पॉलिटिकल टेंशन के बीच एप्पल धीरे-धीरे आईफोन निर्माण के एक बड़े पार्ट को भारत में ट्रांसफर कर रहा रहा है। जानकारों के अनुसार चीन में कोविड लॉकडाउन के कारण प्रोडक्शन में काफी दिक्कतें हुई हैं, जिसकी वजह से कंपनी ने मैन्युफैक्चरिंग को शिफ्ट करने की अपनी योजना को तेज कर दिया है।
150 फीसदी का होगा इजाफा
झेंग्झौ, चीन में फॉक्सकॉन का प्लांट दुनिया में आईफोन के लिए सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है। पिछले महीने, प्रसिद्ध एप्पल विश्लेषक मिंग-ची कुओ ने एक ट्वीट में कहा था कि फॉक्सकॉन अपने भारत प्लांट की कैपेसिटी का विस्तार करेगी, जिसकी वजह से भारत में फॉक्सकॉन द्वारा बनाये गये आईफोन 2023 में कम से कम 150 फीसदी की दर से बढ़ेंगे और कुछ ही सालों में भारत से 40-45 फीसदी आईफोन (वर्तमान 2-4 फीसदी की तुलना में) को शिप करना है।
जेपी मॉर्गन (21 सितंबर, 2022) की एक रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल ने अपने मैन्युफैक्चरिंग बेस में विविधता लाने के लिए 2025 तक अपने आईफोन प्रोडक्शन का 25 फीसदी भारत में ट्रांसफर करने की योजना बनाई है, जो वर्तमान में चीन पर बहुत अधिक निर्भर है। इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) के अध्यक्ष पंकज महेंद्रू ने कहा कि एप्पल सिर्फ जियो पॉलिटिकल की वजह से ही नहीं बल्कि भारत सरकार की पीएलआई स्कीम भी बड़ा कारण है।
एप्पल ने सितंबर 2022 को समाप्त अपने वित्तीय वर्ष में 205 बिलियन डॉलर के स्मार्टफोन का प्रोडक्शन किया था। काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, मेन लैंड चीन का योगदान 2022 में ग्लोबल शिपमेंट का लगभग 91.2-93.5 फीसदी, 2021 में 95.8 फीसदी और 2020 में 98.2 फीसदी से धीरे-धीरे कम हो रहा है। आईफोन के लिए चीन अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है।
कुछ साल पहले जब अमेरिका-चीन के बीच तनाव अपने चरम पर था और ऐपल सहित कंपनियां चीन का विकल्प तलाश रही थीं, तब भारत ने अपनी पीएलआई योजना शुरू की थी। तीन बड़े एप्पल अनुबंध निर्माताओं ने इस योजना के तहत प्रोत्साहन के लिए सफलतापूर्वक आवेदन किया। उसके बाद से ही भारत एप्पल के सामान का निर्माण कर रहा है। तमिलनाडु में फॉक्सकॉन की फैक्ट्री ने ग्लोबल लॉन्च के दस दिनों के भीतर आईफोन 14 का निर्माण शुरू कर दिया।
पेगाट्रोन भी तमिलनाडु में अपने प्लांट में लेटेस्ट डिवाइस बना रही है। मौजूदा समय में एप्पल भारत में आईफोन एसई, आईफोन 12, आईफोन 13 और आईफोन 14 (बेसिक) मॉडल बना रहा है। हालांकि, देश में बिकने वाले सभी प्रो मॉडल इम्पोर्टेड होते हैं। आईडीसी इंडिया के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट नवकेंदर सिंह ने कहा कि अब इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि ऐप्पल भारत में प्रो मॉडल को असेंबल करना शुरू कर देगा, जिनमें से 85 फीसदी वर्तमान में चीन में बनाये जा रहे हैं। एप्पल ऐसा नहीं कर रहा था इसका कारण यह था कि पिछले आईफोन रेंज में प्रो मॉडल के लिए स्थानीय स्तर पर ज्यादा मांग नहीं थी।