टीम एबीएन, हजारीबाग। विनोबा भावे विश्वविद्यालय के छात्र मोर्चा के अध्यक्ष चंदन सिंह ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि विभावि में शोधार्थी को जान बूझ कर परेशान किया जा रहा है। जिसमें यहां के पदाधिकारियों की भी मौन सहमति है।
उपरोक्त विषय से सम्बंधित ममता कुमारी नाम की शोधार्थी (शोध निदेशक चंद्रशेखर सिंह के अधीन बिरसाइत सम्प्रदाय का ऐतिहासिक अध्ययन पर शोध हेतु वर्ष 2007 में निबंधन करवाई) का आवेदन चंदन सिंह को प्राप्त हुआ है।
पत्र में शोधार्थी ने शोध निदेशक पर आरोप लगाया है कि वे पिछले पंद्रह वर्षों से इन्हें टलावा देते आ रहे हैं। शोधार्थी के पूछे जाने पर शोध निदेशक हमेशा अलग बहाना बनाते हैं। वर्ष 2013 में शोध जमा करने के बाद भी शोधार्थी के शोध कार्य में कोई विकास नहीं हुआ है। वहीं शोध निदेशक ने कहा है कि शोध से सम्बंधित सारे दस्तावेज जमा कर दिये गये हैं, परंतु तथ्य इससे कहीं अलग है। विभाग की प्रतिष्ठा और छात्र के भविष्य के साथ ये खिलवाड़ कर रहे हैं।
पूर्व में कुलपति, कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक को पत्र लिखने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर इस सम्बंध में विभागाध्यक्ष को पत्र लिखा है। ज्ञात हुआ है कि ऐसे शोध निदेशक जो छात्र को पिछले 15 वर्षों से बरगला रहे हैं, उन्हें किसी अन्य छात्र के शोध कार्य से भी जोड़ा जा रहा है। अभी हाल में ही अमरेन्द्र कुमार आज़ाद, पुरुषोत्तम कुमार द्विवेदी, मंजु सुमन और रमजान अली अंसारी का शोध निदेशक बनाया गया है। वहीं आग्रह किया है कि शोधार्थी ममता कुमारी के मामले में तत्काल संज्ञान ले। सम्बंधित मामले की प्रतिलिपि परीक्षा नियंत्रक को भी दी गई है।