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डब्ल्यूएमओ का खुलासा : 2015 से 2022 तक सबसे गर्म रहा मौसम

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डब्ल्यूएमओ का खुलासा : 2015 से 2022 तक सबसे गर्म रहा मौसम
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एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने रविवार को एक रिपोर्ट में कहा कि 2022 में वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक (1850-1900) औसत से 1.15 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का अनुमान है, जिससे 2015 से लेकर आठ वर्ष तक की अवधि सबसे गर्म रही हो सकती है। रविवार को जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के लिए कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (सीओपी) के 27वें संस्करण में जारी डब्ल्यूएमओ प्रोविजनल स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट 2022 शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि समुद्र के स्तर में वृद्धि की दर 1993 के बाद से दोगुनी हो गई है और जनवरी 2020 से लगभग 10 मिलीमीटर बढ़कर इस साल एक नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गयी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 30 साल पहले उपग्रह माप शुरू होने के बाद से समुद्र के स्तर में कुल वृद्धि का 10 प्रतिशत हिस्सा पिछले ढाई साल में बढ़ा है। 2022 की अस्थायी रिपोर्ट में इस्तेमाल किये गये आंकड़े इस साल सितंबर के अंत तक के हैं। अंतिम रिपोर्ट अगले साल अप्रैल में जारी की जायेगी। रिपोर्ट में कहा गया है, 2022 में अब तक का वैश्विक औसत तापमान 1850-1900 के औसत से 1.15 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा है। यदि मौजूदा विसंगति वर्ष के अंत तक जारी रहती है, तो विश्लेषण 2022 को (1850 से) रिकॉर्ड में पांचवें या छठे सबसे गर्म वर्ष के रूप में दर्ज करेगा और प्रत्येक मामले में 2021 की तुलना में मामूली गर्म होगा। आठ साल – 2015 से 2022– रिकॉर्ड में आठ सबसे गर्म वर्ष होने की आशंका है। 2022 पांचवा या छठा सबसे गर्म साल : डब्ल्यूएमओ ने कहा कि ला नीना की स्थिति के बावजूद वैश्विक तापमान लगातार दूसरे वर्ष कम रहने के बावजूद, 2022 अभी भी रिकॉर्ड पर पांचवां या छठा सबसे गर्म वर्ष होने की संभावना है। 2013-2022 की अवधि के लिए 10 साल का औसत पूर्व-औद्योगिक आधार रेखा से 1.14 डिग्री सेल्सियस अधिक होने का अनुमान है। इसकी तुलना 2011 से 2020 तक 1.09 डिग्री सेल्सियस के साथ है, जैसा कि जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (आईपीसीसी) की छठी आकलन रिपोर्ट द्वारा अनुमान लगाया गया है। भारत और पाकिस्तान में पूर्व-मानसून की अवधि में असाधारण रूप से गर्मी रही। पाकिस्तान में सबसे अधिक गर्मी मार्च और अप्रैल में रही। गर्मी के कारण फसल की पैदावार में गिरावट आई है। भारत से गेहूं और चावल के निर्यात पर प्रतिबंध से पहले से ही खाद्यान्न की कमी से प्रभावित देशों के लिए मुश्किलें बढ़ गयी हैं। जुलाई और अगस्त में रिकॉर्ड तोड़ बारिश से पाकिस्तान में व्यापक बाढ़ आयी। कम से कम 1,700 व्यक्तियों की मौत हुईं और 3.3 करोड़ लोग प्रभावित हुए जबकि 79 लाख लोग विस्थापित हुए। भारत में भी मानसून के मौसम के दौरान विभिन्न चरणों में महत्वपूर्ण बाढ़ आयी, विशेष रूप से जून में पूर्वोत्तर में ऐसा हुआ। डब्ल्यूएमओ ने कहा कि बाढ़ और भूस्खलन के कारण लगभग 700 लोगों की मौत हो गयी, जबकि 900 लोगों ने आकाशीय बिजली गिरने से जान गंवा दी। बाढ़ से असम में 6,63,000 लोग विस्थापित भी हुए हैं। जितनी ज्यादा गर्मी, उतना ज्यादा प्रभाव : डब्ल्यूएमओ के महासचिव प्रोफेसर पेटेरी तालास ने कहा, जितनी अधिक गर्मी होगी, उतना ही बुरा प्रभाव होगा। कई ग्लेशियरों के लिए पहले ही बहुत देर हो चुकी है और हजारों साल नहीं तो सैकड़ों साल तक उनका पिघलना जारी रहेगा, जिसके जल सुरक्षा के लिए बड़े निहितार्थ होंगे। उन्होंने कहा कि पिछले 30 वर्षों में समुद्र के स्तर में वृद्धि की दर दोगुनी हो गई है। उन्होंने कहा कि हालांकि अभी भी प्रतिवर्ष मिलीमीटर के संदर्भ में मापा जाता है, यह बढ़ोतरी प्रति शताब्दी आधा से एक मीटर तक जाती है और यह लाखों तटीय निवासियों और निचले राज्यों के लिए एक दीर्घकालिक और बड़ा खतरा है। ग्लोबल वार्मिंग के साथ बर्फ पिघलने की दर में वृद्धि के साथ, उपग्रह अल्टीमीटर रिकॉर्ड के 30 वर्षों (1993-2022) में वैश्विक औसत समुद्र स्तर प्रति वर्ष अनुमानित 3.4 मिलीमीटर बढ़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1993-2002 और 2013-2022 के बीच यह दर दोगुनी हो गई है और जनवरी 2021 तथा अगस्त 2022 के बीच समुद्र के स्तर में लगभग 5 मिलीमीटर की वृद्धि हुई है। जनवरी 2020 से, वैश्विक औसत समुद्र स्तर में लगभग 10 मिलीमीटर की वृद्धि हुई है, जो 1993 में उपग्रह माप शुरू होने के बाद से समुद्र के स्तर में कुल वृद्धि का लगभग 10 प्रतिशत है।
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