एबीएन सोशल डेस्क। नई परियोजनाओं की घोषणाओं के बीच केंद्र सरकार अब दशकों से अटकी परियोजनाओं को चालू वित्त वर्ष के अंत का पूरा करने पर ध्यान दे रही है। ऊर्जा और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी करने का जिम्मा नीति आयोग को सौंपा गया था। समझा जाता है कि आयोग ने 5.66 लाख करोड़ रुपये लागत वाली 494 परियोजनाओं को छांटा है जिसे मार्च 2023 तक पूरा किया जाना है। नीति आयोग की आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार इनमें 1.92 लाख करोड़ रुपये की 279 सड़क और राजमार्ग परियोजनाएं, 1.11 लाख करोड़ रुपये की पेट्रोलियम परियोजनाएं, करीब एक लाख करोड़ रुपये की रेलवे से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं पर 3.8 लाख करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है और चालू वित्त वर्ष में इन्हें पूरा करने के लिए 1.8 लाख करोड़ रुपये की और जरूरत आने का अनुमान है।
इनमें से कुछ प्रमुख परियोजनाओं में 28,181 करोड़ रुपये की लागत वाली रेलवे की ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, 14,719 करोड़ रुपये की लागत वाली पावरग्रिड कॉरपोरेशन की पूर्वोत्तर पश्चिमोत्तर इंटरकनेक्टर परियोजना, हिंदुस्तान पेट्रोलियम की 26,264 करोड़ रुपये की लागत वाली विशाख रिफाइनरी आधुनिकीकरण परियोजना शामिल हैं। इन परियोजनाओं को संबंधित मंत्रालयों द्वारा चालू वित्त वर्ष की शुरुआत में पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 नवंबर को विशाखापत्तनम दौरे के समय विशाख रिफाइनरी के आधुनिकीकरण की आधारशिला रखेंगे। इस साल की शुरूआत में केंद्र ने नीति आयोग को अटकी परियोजनाओं को मिशन मोड में पूरा करना सुनिश्चित कराने का जिम्मा दिया था। विभिन्न मंत्रालयों के साथ विचार-विमर्श के बाद 1,500 में से 494 परियोजनाओं को चालू वित्त वर्ष में पूरा करने के लिए छांटा गया था। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि सरकार की ओर से इन परियोजनाओं की प्रगति पर करीब से नजर रखी जा रही है।
इस बीच विभिन्न विभागों और राज्य तथा केंद्र सरकार के मंत्रालयों के बीच सामंजस्य नहीं होने की वजह से कई परियोजनाएं अटकी थीं। जुलाई में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नीति आयोग को लंबित सभी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को चिह्नित करने और उन्हें पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत लाने की संभावना तलाशने के लिए कहा था ताकि इन परियोजनाओं में तेजी लाई जा सके। परियोजनाओं की समीक्षा से पता चला कि रेलवे और कोयला से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति धीमी है। रिपोर्ट में कहा गया कि इन परियोजनाओं को चालू वित्त वर्ष में पूरा करने के लिए व्यापक प्रयास किए जाने की जरूरत है। रेलवे से जुड़ी 50 परियोजनाएं ऐसी थीं जिनकी लागत 55,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। इसी तरह दूरसंचार क्षेत्र से जुड़ी कुछ परियोजनाओं की लागत करीब दोगुनी हो गई। राजमार्ग से जुड़ी 279 परियोजनाओं की लागत में 8,000 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है।