एबीएन सेंट्रल डेस्क। मच्छू नदी पर बने सस्पेंशन ब्रिज के रखरखाव का जिम्मा गुजरात की एक प्रतिष्ठित कंपनी ओरेवा ग्रुप के पास थी। बता दें कि ओरेवा ग्रुप वही कंपनी है जो घर-घर में मौजूद अजन्ता ब्रांड की घड़ियों का निर्माण करती है। ओरेवा ग्रुप को कंपनी के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी 15 वर्षों के लिए दी गई थी। इसी वर्ष मार्च में ब्रिज के पुनरुद्धार के लिए इसे बंद कर दिया गया था। इसे बीते 26 अक्तूबर को ही गुजराती नववर्ष के मौके पर दोबारा खोला गया था। ब्रिज की सैर के लिए कंपनी लोगों से 17 रुपये प्रति व्यक्ति का शुल्क भी वसूल रही थी।
घड़ी से लेकर ई-बाइक्स तक बनाती है कंपनी : सस्पेंशन ब्रिज के रखरखाव का जिम्मा संभालने वाली मोरबी स्थिति ओरेवा ग्रुप अजंता मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम से भी प्रचलित है। कंपनी दीवार घड़ियों से लेकर ई-बाइक्स और इलेक्ट्रिकल बल्व तक का निर्माण करती है। हादसे के बाद कंपनी लोगों के निशाने पर आ गई है। पुल का मेंटेनेंस कार्य हासिल करने से पहले कंपनी ने दावा किया था कि वह नवीनतम तकनीक के इस्तेमाल से पुल को इस रूप में विकसित करना चाहती है जिससे दीवार घड़ियों के निर्माण के लिए पहले से मशहूर मोरबी को एक नई पहचान मिले।
45 देशों तक फैला कारोबार : ओरेवा ग्रुप के संस्थापक ओधवजी पटेल थे। कंपनी का कारोबार फिलहाल दुनिया के 45 देशों तक फैला है। कंपनी के पास लगभग 7000 कर्मचारी हैं, जिनमें 5000 महिलाएं हैं। कंपनी घड़ी और ई-बाइक्स बनाने के साथ-साथ किसानों के लिए जल संचयन का भी कार्य करती है। कंपनी ऊर्जा का बचत करने वाले एलईडी बल्स, कैलकुलेटर्स और टाइल्स का भी निर्माण करती है। गुजरात के मोरबी और कच्छ जिले में ओरेवा ब्रांड के नाम से कंपनी स्नैक्स के कारोबार में भी दखल रखती है।
दीवार घड़ियों के पिता थे संस्थापक : कंपनी का मुख्यालय अहमदाबाद के एसजी हाईवे पर मौजूद थालतेज सर्कल पर स्थित है। अक्तूबर 2012 में दीवार घड़ियों के पिता के तौर पर मशहूर ओधवजी पटेल की मौत के बाद उनके बेटे जयसुख ओधवजी ओरेवा समूह का कारोबार संभाल रहे हैं। कंपनी का टर्नओवर करीब 800 करोड़ रुपये का है। जयसुख ओधवजी को वर्ष 2020 में गुजरात के अहमदाबाद पश्चिम लोकसभा सीट के सांसद कीर्ति सोलंकी ने नव नक्षत्र सम्मान नाम के बिजनेस अवार्ड से भी सम्मानित किया था।
कौन सी चूक ने ले ली 132 की जान : मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुल का जीर्णोद्धार करने वाले जिंदल ग्रुप ने इस ब्रिज के लिए 25 साल की गारंटी दी थी। हालांकि कंपनी ने ब्रिज पर एक साथ 100 लोगों को चढ़ने देने की इजाजत देने की बात कही थी। इस ब्रिज का फिटनेस सर्टिफिकेट और सरकार के तीन एजेंसियों के द्वारा जांच होना बाकी था। लेकिन दीपावली के दौरान हड़बड़ी में जय सुख भाई पटेल ने अपनी पौत्री के हाथों इस ब्रिज का उद्घाटन करवा दिया। बताया गया है कि हादसे के वक्त ब्रिज पर 500-700 लोग थे।
मोरबी नगरपालिका लगा रही आरोप : हादसे के बाद मोरबी नगरपालिका के प्रमुख संदीप सिंह जाला ने कहा है कि कंपनी ने नगरपालिका से फिटनेस सर्टिफिकेट लिए बिना ही बीते हफ्ते पुल को आम लोगों के लिए खोल दिया। उनके अनुसार पुल जीर्णोद्धार का कार्य एक सरकारी निविदा के तहत किया गया था, ऐसे में ओरेवा ग्रुप को कराए गए कार्य की विस्तृत जानकारी नगरपालिका को उपलब्ध करानी चाहिए थी। उन्हें पुल को दोबारा शुरू करने से पहले क्वालिटी जांच भी करवानी चाहिए थी, पर ऐसा नहीं किया गया। सरकार को भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि पुल को दोबारा चालू कर दिया गया है।
एफआईआर में किसी का नाम नहीं : बता दें कि फिलहाल हादसे के संबंध में दर्ज की गई एफआईआर में जयसुख या ओरेवा ग्रुप का नाम कहीं दर्ज नहीं है। पुलिस ने अब तक इस मामले में किसी आरोपित को चिह्नित नहीं किया है। हां, ब्रिज के मेंटेनेंस का काम करने वाली एजेंसी, उसके प्रबंधकों और अन्य के खिलाफ शिकायत जरूर दर्ज की गई है, पर उनके बारे में फिलहाल कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। हादसे की जांच का कार्य डीएसपी पीए जाला को सौंपा गया है। पुलिस का कहना है कि यह लापरवाही का मामला है।