एबीएन सेंटल डेस्क। कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट के दो-दो सब वैरिएंट ने चीन में फिर से संक्रमण फैला दिया है। यहां पांच से ज्यादा राज्यों में संक्रमण के मामलों में अचानक से उछाल आया है जिसे वैज्ञानिक नये सब वैरिएंट का असर मान रहे हैं, लेकिन भारत की स्थिति फिलहाल इससे कुछ अलग है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले साल से देश में संक्रमित मिल रहे मरीजों में ओमिक्रॉन वैरिएंट की पुष्टि हो रही है। अब तक देश में ओमिक्रॉन के नौ सब वैरिएंट की पहचान हो चुकी है जिनका प्रसार सबसे अधिक है लेकिन इनमें वे दो सब वैरिएंट शामिल नहीं है जो चीन में मिले हैं।
जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए गठित इन्साकॉग नेटवर्क के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि देश में अभी तक ओमिक्रॉन के बीए.1, बीए.2, बीए.3, बीए.4, बीए.5, बीए.2.9, बीए.2.12.1, बीए.2.3.8 और बीए.2.73 नामक सब वैरिएंट मिले हैं जो चीन में मिले BF.7 और BA.5.1.7 के समान नहीं हैं। चीन में मिले दोनों सब वैरिएंट अत्यधिक संक्रामक हैं और तेजी से फैल रहे हैं। इनमें से BF.7 नामक सब वैरिएंट की प्रसार क्षमता सबसे अधिक होने की सूचना है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक देश में नये सब वैरिएंट की पहचान नहीं हुई है, लेकिन सरकारों को तत्काल अलर्ट जारी करना चाहिए और विदेश यात्रा को लेकर निगरानी बढ़ानी चाहिए। अगर पुराने अनुभव के आधार पर बात करें तो यह जरूरी नहीं है कि चीन में फैलने वाले सब वैरिएंट दूसरे देशों में नहीं मिल सकते। दरअसल, देश में कोरोना वायरस की निगरानी के लिए सरकार ने साल 2020 में इन्साकॉग नेटवर्क गठित किया था जिसके अधीन देश भर की प्रयोगशालाओं में जीनोम सीक्वेंसिंग की जाती है।