एबीएन सेंट्रल डेस्क। स्वच्छ भारत अभियान के तहत काराकोरम और हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं के बीच पाकिस्तान सीमा से सटा एक गांव चमचमाता उदाहरण बनकर सामने आया है। नियंत्रण रेखा के करीब यह बेहद कम आबादी वाला गांव है। इस गांव से पाकिस्तानी चौकियां साफ नजर आती हैं। भारत की यह सुदूर चौकी अब स्वच्छ भारत अभियान की एक ज्वलंत मिसाल बन गई है। स्थानीय लोगों ने स्वच्छता का ऐसा आंदोलन छेड़ा कि गांव के आसपास खेलों लांकि बिल्कुल स्वच्छ वातावरण है।
भारत की सुदूर चौकी टुर्तुक स्वच्छ भारत अभियान से शिद्दत से जुड़ी है। भारत की यह दूरस्थ चौकी का पर्यटन 2010 में सामने आया। इसके बाद गांव में प्लास्टिक कचरा और अन्य प्रदूषक तत्वों की सफाई शुरू हुई। इस सुदूर गांव में स्वच्छता अभियान की शुरुआत और "हर घर तिरंगा" अभियान की सफलता से भी लोगों का उत्साह बढ़ा। इसके बाद भारत के लगभग सबसे दूरदराज के हिस्से में राष्ट्रीय गौरव और एकीकरण का एक मजबूत संदेश स्वच्छता अभियान से भी दिया गया।
यहां के ग्रामीणों ने महसूस किया कि पर्यावरण के साथ उनका नाजुक रिश्ता दाव पर है। भारत अभियान को लागू करने का जिम्मा अपने ऊपर ले लिया। स्वच्छता अभियान के दौरान बच्चों ने जमकर नारे भी लगाये। "साफ करो, साफ करो, अपना मोहल्ला साफ करो।" "स्वच्छ दुर्तुक, हरा टुर्तुक!", "भारत माता की जय!", "वंदे मातरम ! दिलचस्प बात यह है कि कुछ पर्यटक भी इन बच्चों से प्रेरित हुए और छात्रों और आयोजकों के साथ स्वच्छता अभियान में शामिल हुए।
बता दें कि टुर्तुक में पर्यटन सीजन बड़े पैमाने पर अप्रैल से सितंबर के बीच शुरू होता है। इस साल इस गांव में देश भर से और यहां तक कि देश के बाहर से बड़ी संख्या में आगंतुकों को देखा गया। कोविड 19 महामारी - के कारण पर्यटन प्रभावित हुआ था दो साल बाद खोले जाने पर यहां बड़ी संख्या में टूरिस्ट पहुंचे।
पर्यटन से टुर्तुक की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने के बावजूद प्लास्टिक और अन्य गैर- बायोडिग्रेडेबल कचरे का संचय प्लास्टिक जैसे तत्वों से मुक्ति पाने के लिए स्थानीय लोगों ने देश को के सबसे दूरस्थ हिस्से में स्वच्छ काफी अधिक मात्रा में किया गया किया गया था इसलिए पर्यावरण संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए एक स्थानीय गैस्ट हाऊस के मालिक हशमतुल्ला और पोर्टिया कॉनराड ने टुर्तुक गांव में एक स्वच्छता अभियान चलाने की पहल की। कॉनराड नई दिल्ली के एक शोध विद्वान हैं।
कॉनराड बताते हैं कि वह बाल्टी समुदाय पर चल रही एक शोध परियोजना के लिए टुर्तुक का दौरा करने आए थे। इस पहल में सरकारी स्कूलों और दुर्तुक वैली स्कूल के बच्चों ने भी भाग लिया। छुट्टी और निर्धारित परीक्षा होने के बावजूद, 75 से अधिक बच्चे दो अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर कचरा इकट्ठा करने के लिए एकत्र हुए।
अभियान से पहले सभी छात्रों को मास्क दिया गया और ग्रामीणों में जागरूकता के लिए पोस्टर भी बनाये गये। टुर्तुक में स्वच्छता अभियान मुख्य तुरतुक पुल से गांव के दोनों किनारों तक चलाया गया। सफाई अभियान दो घंटे तक चला और कुल 57 बोरी गैर जैव निम्नीकरणीय कचरा एकत्र किया गया।