मुआवजा नहीं देने पर बड़ी कार्रवाई: बीएसआरटीसी की बस जब्त कर लायी गयी रांची सिविल कोर्ट परिसर, हाईकोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत
टीम एबीएन, रांची/ पटना। सड़क दुर्घटना में मृत व्यक्ति के परिजनों को मुआवजा राशि नहीं देने पर बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) पर अदालत का बड़ा डंडा चला है। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी), रांची के कुर्की आदेश के अनुपालन में शुक्रवार को बीएसआरटीसी की एक बस को जब्त कर रांची सिविल कोर्ट परिसर में लाकर खड़ा कर दिया गया है। अब करीब 1.15 करोड़ रुपये की पूरी मुआवजा राशि का भुगतान करने के बाद ही यह बस रिलीज हो सकेगी।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2023 में दायर मोटर दुर्घटना दावा वाद (संख्या 238/2023) में एमएसीटी ने 2024 में फैसला सुनाते हुए बीएसआरटीसी को मृतक विभूति प्रसाद सिंह की पत्नी मुन्नी देवी और उनके तीन बच्चों को 93,38,294 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस राशि पर 26 मई 2023 से भुगतान की तिथि तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय है। मूल राशि और ब्याज मिलाकर कुल देनदारी लगभग 1.15 करोड़ रुपये (1,15,10,126 रुपये) बनती है।
चार बसों की कुर्की का आदेश
लंबे समय तक मुआवजा राशि का भुगतान न होने पर पीड़ित परिवार ने निष्पादन याचिका (केस नंबर : 23/2025) दाखिल की थी। इस पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने निगम की चार बसों- बीआर 01 पीएल 9620, बीआर 01 पीएल 7533, बीआर 01 पीएल 7534 और बीआर 02 पीसी 2620 को जब्त करने का आदेश जारी किया। सिविल कोर्ट के नाजिर जीशान इकबाल और पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता प्रदीप कुमार अग्रवाल की अगुवाई में रांची बस डिपो में छापेमारी की गयी। डिपो में केवल एक बस मिलने पर उसे तुरंत जब्त कर कोर्ट परिसर लाया गया।
हाईकोर्ट से भी याचिका खारिज
कार्रवाई से बचने के लिए निगम ने पहले न्यायाधिकरण में एकपक्षीय आदेश को वापस लेने का आवेदन दिया था, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद निगम ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने 17 अप्रैल 2026 को समीक्षा याचिका को खारिज करते हुए टिप्पणी की कि पहले के फैसले में कोई त्रुटि नहीं है और ऐसी याचिकाएं न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग हैं। हाईकोर्ट से भी झटका लगने के बाद अदालत के निर्देश पर यह सख्त कुर्की कार्रवाई की गयी है, जिससे निगम पर परिजनों का बकाया तुरंत चुकाने का दबाव बढ़ गया है।