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अनंत सिंह : जेल से तीन बार चुनाव जितने वाले “राजनीतिक बाज़ीगर”, लेकिन...

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अनंत सिंह : जेल से तीन बार चुनाव जितने वाले “राजनीतिक बाज़ीगर”, लेकिन...
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  • अनंत सिंह : जेल से तीन बार चुनाव जितने वाले “राजनीतिक बाज़ीगर”, लेकिन... 

बासुकीनाथ पाण्डेय

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। मोकामा में अनंत सिंह कोई नेता नहीं, एक “सीजनल त्योहार” हैं, जब लगे कि अब खत्म, तब वे जले हुए राख से उठकर चुनाव जीत जाते हैं। पार्टी बदलती रही, टिकट कटता रहा, जेल का दरवाजा खुलता-बंद होता रहा, लेकिन जनता का प्यार बस बना रहा।

शुरुआत में भाई-भतीजावाद नहीं, भाई की हत्या और गैंगवार का सीरियल चला, दो भाई गए, दिलीप-अनंत जोड़ी आक्रामक हुई। फिर सूरजभान सिंह जैसे बाहुबल का उदय हुआ। दिलीप चुनाव हारे। फिर अनंत आए- जदयू का तीर छाप टिकट लेकर और जीत गए। जनता ने कहा- एक बार नहीं, दो-दो बार।

पत्रकारों से सवाल-जवाब में तालमेल नहीं बैठा, पिटाई हुई, गिरफ्तारी भी हुई, फिर छुट्टी। चुनाव आया, विपक्षी खड़ा हुआ, अनंत जीत गए। फिर 2015 में पुटुस यादव हत्याकांड। अनंत जेल गए, टिकट कटा। नीरज ने सोचा - अब तो जीत पक्की लेकिन जेल में बैठे अनंत निर्दलीय लड़े और नीरज को हरा दिया, यानी जनता ने गठबंधन को नहीं, अनंत को वोट दिया।

फिर AK47 और ग्रेनेड का सीरियल। घर से हथियार बरामद, मीडिया में हल्ला, अनंत ने आरोप दूसरों पर डाला, दिल्ली में सरेंडर किया। लोग बोले - अब तक अनंत खत्म। अगले चुनाव में राजद ने टिकट दिया, जेल में रहते हुए अनंत ने जीत हासिल की यानी जेल अनंत के लिए चुनाव प्रचार का सस्ता और सुरक्षित मंच बन गया। सजा हुई, विधायकी गई फिर उपचुनाव में पत्नी को टिकट मिला और वे जीत गईं यानी सीट परिवार की, जनता की नजर में अनंत की।

नीतीश कुमार का मन घूमा, सरकार बदली, फ्लोर टेस्ट हुआ। अनंत की पत्नी ने भी समर्थन दे दिया फिर हाईकोर्ट ने AK47 मामले में बरी किया। फिर सोनू-मोनू विवाद में जेल, फिर छुट्टी। फिर जदयू ने टिकट दिया - क्योंकि फ्लोर टेस्ट का “एहसान” था। प्रचार दुलारचंद यादव की हत्या का आरोप, फिर गिरफ्तारी लेकिन जेल में बैठे अनंत ने चुनाव जीत लिया।

अब जदयू से निकाला गया है। सवाल यह है कि क्या नई पार्टी बनाएंगे? क्या पुराने प्रतिद्वंद्वी को हरा पाएंगे? भविष्य तो भविष्य है। लेकिन एक बात तय है - अनंत सिंह का दबदबा था, दबदबा है और जेल की सलाखों से भी दबदबा रहेगा। कुछ लोग हारने के लिये पैदा नहीं होते उनके भाग्य में ही विजय लिखा होता है। 

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