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बालासोर रेल हादसे के मृतकों को श्रद्धांजलि देकर दोषियों को सजा देने की मांग

बालासोर रेल हादसे के मृतकों को श्रद्धांजलि देकर दोषियों को सजा देने की मांग

टीम एबीएन, रांची। पहले हुई रेल दुर्घटनाओं से सबक लिया गया होता तो इतने लोगों की जान नहीं जाती। बालासोर रेल दुर्घटना में मारे गये यात्रियों और मजदूरों को आज रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर विभिन्न संगठनों ने श्रृद्धांजलि अर्पित किया। ऐक्टू,माले,बगाईच, इंसाफ मंच और जेएएसएम के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में अपने हाथों में कैंडल जलाकर एक मिनट का मौन श्रद्धांजलि अर्पित किया। 

उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में आम लोगों का असमय मौत का शिकार हो जाना अत्यंत दुखद घटना है। तीन दिनों के बाद भी बिछडे यात्रियों का पता नहीं चलना मौत की पेश की जा रही संख्या पर भी सवाल खड़ा करता है। इसके दोषियों को कठोर सजा की मांग करते हैं। सभी मृतकों का सही पता लगाना, मृतकों के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा की मांग करते हैं। 

बालासोर रेल दुर्घटना दुनियां की सबसे वीभत्स रेल दुर्घटनाओं में से एक है। दुर्घटना के बाद अब सुपर फास्ट बंदे भारत जैसे ट्रेन के ज्यादा दुर्घटना मुक्त रेल की जरुरत ज्यादा है। मोदी सरकार के शासन में अबतक चार बडी रेल दुर्घटनाएं हुई है जिसमे तीन दुर्घटनाये यात्री ट्रेनों के मालगाड़ियों से टकराने से हुई है। 

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मालगाड़ियों को यात्रियों से ज्यादा सुपर फास्ट बना दिया गया है। कैग की रिपोर्ट में सुरक्षा मद की राशी का गैर योजना मद में खर्च करने पर आपत्ति के बावजूद सुझावों को नहीं मानना गंभीर मामला है। नेताओं के द्वारा घड़ियाली आंसू बहाने के बजाय अब बचाव के ठोस पहल किया जाना चाहिए। इसके पहले हुई रेल दुर्घटनाओं से सबक लिया गया होता तो शायद इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था।

सुरक्षा कवच से ज्यादा मेन पावर की कमी मुख्य करण है और इसके लिए केंद्र सरकार और रेल मंत्री की नीतियां ज़िम्मेदार है, रेल मंत्री नैतिक जिम्मेदारी कबूलते हुए मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए। यह रेल हादसा केंद्र सरकार की कॉरपोरेट परस्त नीतियों की देन है। उक्त जानकारी ऐक्टू रांची के सचिव भुवनेश्वर केवट ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

टीम एबीएन, रांची। पहले हुई रेल दुर्घटनाओं से सबक लिया गया होता तो इतने लोगों की जान नहीं जाती। बालासोर रेल दुर्घटना में मारे गये यात्रियों और मजदूरों को आज रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर विभिन्न संगठनों ने श्रृद्धांजलि अर्पित किया। ऐक्टू,माले,बगाईच, इंसाफ मंच और जेएएसएम के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में अपने हाथों में कैंडल जलाकर एक मिनट का मौन श्रद्धांजलि अर्पित किया। 

उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में आम लोगों का असमय मौत का शिकार हो जाना अत्यंत दुखद घटना है। तीन दिनों के बाद भी बिछडे यात्रियों का पता नहीं चलना मौत की पेश की जा रही संख्या पर भी सवाल खड़ा करता है। इसके दोषियों को कठोर सजा की मांग करते हैं। सभी मृतकों का सही पता लगाना, मृतकों के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा की मांग करते हैं। 

बालासोर रेल दुर्घटना दुनियां की सबसे वीभत्स रेल दुर्घटनाओं में से एक है। दुर्घटना के बाद अब सुपर फास्ट बंदे भारत जैसे ट्रेन के ज्यादा दुर्घटना मुक्त रेल की जरुरत ज्यादा है। मोदी सरकार के शासन में अबतक चार बडी रेल दुर्घटनाएं हुई है जिसमे तीन दुर्घटनाये यात्री ट्रेनों के मालगाड़ियों से टकराने से हुई है। 

मालगाड़ियों को यात्रियों से ज्यादा सुपर फास्ट बना दिया गया है। कैग की रिपोर्ट में सुरक्षा मद की राशी का गैर योजना मद में खर्च करने पर आपत्ति के बावजूद सुझावों को नहीं मानना गंभीर मामला है। नेताओं के द्वारा घड़ियाली आंसू बहाने के बजाय अब बचाव के ठोस पहल किया जाना चाहिए। इसके पहले हुई रेल दुर्घटनाओं से सबक लिया गया होता तो शायद इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था।

सुरक्षा कवच से ज्यादा मेन पावर की कमी मुख्य करण है और इसके लिए केंद्र सरकार और रेल मंत्री की नीतियां ज़िम्मेदार है, रेल मंत्री नैतिक जिम्मेदारी कबूलते हुए मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए। यह रेल हादसा केंद्र सरकार की कॉरपोरेट परस्त नीतियों की देन है। उक्त जानकारी ऐक्टू रांची के सचिव भुवनेश्वर केवट ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

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