टीम एबीएन, रांची। कृषि अक्सर मानसून के कारण प्रभावित होती रहती है। कभी अतिवृष्टि तो कभी अल्पवृष्टि, कभी बाढ़ तो कभी सुखाड़। प्रकृति का यह कालचक्र है जिसका खामियाजा लगातार किसानों को भुगतना पड़ता है। सावन महीना समाप्त होने में अब 6 दिन बचे हैं। लेकिन, झारखंड के गिरिडीह जिले में बारिश की स्थिति ऐसी है कि नदी, नाले, तालाब, जोरिया और कुआं सभी सूखे पड़े हैं। खेती के लिए पानी तो दूर मवेशियों को प्यास बुझाने के लिए पानी बड़ी मुश्किल से मिल पा रहा है। बारिश की यही स्थिति रही तो किसानों को सुखाड़ ही नहीं अकाल का भी सामना करना पड़ सकता है। गिरिडीह जिले में बारिश की स्थिति इतनी खराब है कि जुलाई महीने गुजर जाने के बाद भी जिले भर में अब तक मात्र 2.2% ही धनरोपनी हो पाई है। किसान मोटर पंप का सहारा लेकर कुएं व तालाब का पानी से थोड़ा बहुत जान बचाने के लिए खेती कर रहे हैं। धान के अलावे जो भी खरीफ फसलें लगाई गई है वह भी पानी के अभाव में झुलस रहे हैं। गिरिडीह जिले भर में जून महीने में तो बारिश हुई ही नहीं, जुलाई माह में भी बारिश नहीं हो पाई। पूरे जुलाई माह में मात्र 96.6 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि जुलाई महीने में सामान्य वर्षापात 297.9 मिलीमीटर होना था। इसी तरह जून माह में मात्र 92.8 मिलीमीटर बारिश हो पाई, जबकि सामान्य वर्षापात 144.2 मिली मीटर होना था। अगस्त महीने में 291.5 मिलीमीटर बारिश होनी है, लेकिन, 4 दिनों में मात्र 22.8 मिलीमीटर बारिश हो पाई है। जबकि बीते वर्ष 2021-22 में जून महीने में 352.9 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इसी तरह जुलाई महीने में 221.8 मिलीमीटर और अगस्त महीने में 125.7 मिलीमीटर बारिश हुई थी। बारिश की इस दयनीय स्थिति को लेकर जिला कृषि पदाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि समय पर बारिश नहीं हो पाई है। धान की खेती का समय निकला जा रहा है। किसान दलहन और तिलहन की फसलों में मक्का, अरहर आदि की फसलें लगाए हैं। इसके लिए जिले भर में किसान गोष्ठी आयोजित कर किसानों को जानकारी दी जा रही है और सरकार के तरफ से हरसंभव उन्हें मदद की जाएगी।