बाघमारा। मानव जाति अपनी विकास की गाथा लिखते लिखते अपने हाथों से ही अपने विनाश की गाथा भी लिख रही है। बताते चलें कि धनबाद जिले के बाघमारा अंचल में फाटा माहुल पंचायत के अंतर्गत कांको मौजा में इन दिनों जमीन बेचने की ललक में जमीन विक्रेताओं के द्वारा दर्जनों हरे-भरे बड़े बड़े पेड़ों को काटकर गिरा दिया गया है। पेड़ काटने के लिए अंचल से या फिर वन विभाग से कोई अनुमति नहीं ली गई है। इसके साथ ही गैरमजरूआ जमीन पर भू माफियाओं के द्वारा जेसीबी चलाकर जमीन को समतल किया जा रहा है और सबसे बड़ी बात कतरास की लाइफलाइन कही जाने वाली कजरी नदी से महज 30 फीट की दूरी पर भू माफियाओं के द्वारा दो दो जेसीबी मशीन चला कर दिन रात काम कर जंगल को खत्म किया जा रहा है । स्थानीय ग्रामीण भोला मांझी ने बताया कि कुछ जमीन रैयती है लेकिन नदी के तरफ जो जेसीबी चलाकर काम किया जा रहा है वह जमीन गैरमजरूआ जमीन है और सरकारी जमीन पर भू माफियाओं की नजर पड़ चुकी है। इस मामले को लेकर जब फाटामाहुल पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि बीरबल मंडल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कांको ग्राम समिति के द्वारा वर्षों पहले 10,000 पेड़ लगाई गई थी। जिसकी रक्षा कर ग्रामीणों ने पेड़ को बड़ा किया। लेकिन अभी भू माफियाओं के द्वारा बिना किसी अनुमति लिए हुए पेड़ों को काटा जा रहा है जो बिल्कुल ही गैरकानूनी है। साथ ही मुखिया प्रतिनिधि ने बताया कि काको मौजा में जमीन की लूट मची हुई है। बाहर के लोग आकर जमीन लूट रहे हैं, इसमें कुछ स्थानीय लोगों की भी मिलीभगत है। जल्द ही इस मामले को लेकर बाघमारा सीओ और वन विभाग को लिखित शिकायत दी जाएगी।