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रिपोर्ट का दावा... 5 साल में ही डेढ़ डिग्री सेंटीग्रेड तक गर्म हो सकती है दुनिया

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रिपोर्ट का दावा... 5 साल में ही डेढ़ डिग्री सेंटीग्रेड तक गर्म हो सकती है दुनिया
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एबीएन सेंट्रल डेस्क। पिछले कुछ सालों से पर्यावरण के लिए ग्लोबल वार्मिंग एक चिंताजनक विषय बना हुआ है। पेरिस समझौते में गर्म होती पृथ्वी के औसत तापमान को नीचे बकरार रखने के लिए एक लक्ष्य तय हुआ था। औद्योगिक क्रांति काल के औसत तापमान की तुलना में वर्तमान औसत तापमान वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस से काफी (संभव हो ते 1.5 डिग्री से भी) नीचे रखने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन हाल ही संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट ने चेताया है कि 1.5 डिग्री की सीमा तो अगले पांच साल में पार हो सकती है। खतरे में पेरिस समझौते के लक्ष्य : साल 2015 में पेरिस समझौते में में तय किए गए तापमान वृद्धि को नियंत्रित करने के लक्ष्यों में बदलाव करने के प्रयास पिछले साल ग्लासगो में हुए जलवायु सम्मेलन में किए गए थे लेकिन इन लक्ष्यों में कायम रखने पर ही सहमति बन सकी। अब संयुक्त राष्ट्र की विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने अपने वार्षिक जलवायु अपडेट में कहा है कि संभावना है कि वैश्विक सतह के पास के तापमान पूर्व औद्योगिक काल से 1.5 डिग्री ज्यादा की वृद्धि 2022 स 2026 के किसी भी साल में होने की आधी आधी संभावना बन गई है। टूट सकता है 2016 का रिकॉर्ड : डब्ल्यूएमओ ने इस संभावना को 48 प्रतिशत रखा है और कहा है कि यह समय के साथ बढ़ रही है। इससे पेरिस समझौते की लक्ष्य टूट सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस बात के 90 प्रतिशत संभावना है कि की 2022-2026 के बीच किसी एक साल में पृथ्वी 2016 के रिकॉर्ड को तोड़ कर सबसे ज्यादा गर्म हो सकती है। निचले लक्ष्य की ओर : इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि साल 2022-2026 के बीच का पांच साल का औसत तपमान पिछले पांच साल (2017-2021) के औसत तापमान से ज्यादा होने की संभावना भी करीब 93 प्रतिशत है। डब्ल्यू एम ओ के प्रमुख पेटेरी तालास ने कहा कि यह अध्ययन दशार्ता है कि उच्च स्तर की वैज्ञानिक क्षमताओं के साथ हम अस्थायी तौर पर पेरिस समझौते के निचले लक्ष्य तक पहुंच रहे हैं। अभी से ही बढ़ रहा है तापमान : तालास ने कहा कि 1.5 डिग्री सेंटीग्रेट का आंकड़ा कोई बेतरतीब संख्यिकीय आंकड़ा नहीं है। बल्कि यह तो एक सांकेतिक बिंदु है जो दशार्ता कि जलवायु प्रभाव लोगों और यहां तक कि पूरे ग्रह के लिए तेजी से नुकसानदेह बनता जा रहा है। पेरिस समझौते के 1।5डिग्री का स्तर लंबे समय की वार्मिंग को दशार्ता है। लेकिन तात्कालिक बढ़ोत्तरी ही वैश्विक तापमान वृद्धि की आवृति को बढ़ा रहे हैं
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