झारखंड: दलमा अभयारण्य में अवैध निर्माण पर केंद्रीय समिति सख्त, वन विभाग को लगायी फटकार
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पलामू। दलमा वन्यजीव अभयारण्य में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की अनुमति के बिना कॉटेज और गेस्ट हाउस के निर्माण के मामले में केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान समिति ने झारखंड वन विभाग को कड़ी फटकार लगाते हुए नियमों के उल्लंघन पर सवाल उठाये। समिति ने वन विभाग और पर्यटन विभाग को अपना पक्ष रखने के लिए ढाई सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है। दोनों विभागों के लिखित जवाब और शपथ पत्र मिलने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जायेगा।
निर्माण कार्यों पर जतायी कड़ी आपत्ति
सुनवाई के दौरान दलमा के डीएफओ सबा आलम अंसारी वन विभाग की ओर से उपस्थित हुए। पीठ ने उनसे पूछा कि वन क्षेत्र में सरकारी राशि खर्च करने और निर्माण कार्य कराने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया।
समिति ने यह भी सवाल उठाया कि नियमों की अनदेखी कर निर्माण कराने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। सुनवाई के दौरान वन विभाग और पर्यटन विभाग, दोनों में से किसी ने भी अपना लिखित जवाब या शपथ पत्र पेश नहीं किया। इस कारण समिति ने दोनों विभागों को अपना पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त समय दिया।
मामले में याचिकाकर्ता प्रतीक शर्मा की ओर से अधिवक्ता सौरभ शर्मा ने पक्ष रखते हुए निर्माण कार्यों पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने पीठ को बताया कि दलमा अभयारण्य के मकुलाकोचा और पिंड्राबेड़ा क्षेत्रों में पर्यटन विभाग की वित्तीय मदद से वन विभाग पर्यटक कॉटेज का निर्माण करा रहा है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, निर्माण से पहले राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की अनिवार्य अनुमति नहीं ली गई और न ही वन संरक्षण कानून के प्रावधानों का पालन किया गया। याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2020 में स्वीकृत दलमा अभयारण्य की प्रबंधन योजना के अध्याय आठ में नए कॉटेज के निर्माण का कोई प्रावधान नहीं है। याचिकाकर्ता ने समिति से दलमा अभयारण्य में चल रहे सभी कथित अवैध निर्माण कार्यों को तत्काल रोकने की मांग की है।
साथ ही, बिना वैध अनुमति के विकास कार्यों को मंजूरी देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की सिफारिश करने का अनुरोध किया है। अभयारण्य क्षेत्र में निर्माण कार्य पहले ही रोक दिया गया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि वन विभाग और पर्यटन विभाग के लिखित जवाबों का अध्ययन करने के बाद ही मामले में अंतिम निर्णय लिया जायेगा।