झारखंड में बाघों की गिनती के लिए 600 से अधिक कैमरों का इस्तेमाल, कई हिस्सों में लगाया गया है कैमरा
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में टाइगर ऐस्टीमेशन का कार्य चल रहा है। बाघों की गिनती के लिए पलामू टाइगर रिजर्व को नोडल बनाया गया है। पूरे देश में पलामू टाइगर रिजर्व बाघों की गिनती में सबसे आगे है। 15 दिसंबर से झारखंड में बाघों की गिनती शुरू हुई है। दिसंबर से अप्रैल महीने तक बाघों की गिनती पूरी करने का लक्ष्य है, उसके लिए चार अलग-अलग चरण निर्धारित किये गये हैं। बाघों की गिनती के लिए कैमरा ट्रैप का कार्य किया जा रहा है। बाघों की गिनती के लिए पूरे झारखंड में 600 से अधिक हाई रिजोल्यूशन वाले कैमरे का इस्तेमाल किया जा रहा है।
पलामू टाइगर रिजर्व और हजारीबाग के इलाके में कैमरा ट्रैप का कार्य पूरा हो गया है। पलामू टाइगर रिजर्व के कैमरे के डाटा को कंपाइल कर लिया गया है, जबकि हजारीबाग के इलाके में लगे कैमरों के डाटा को इकट्ठा किया जा रहा है। पलामू टाइगर रिजर्व से बाहर गढ़वा और लातेहार के साथ साथ चतरा के इलाके में ट्रैप लगाया जा रहा है।
पहली बार पूरे झारखंड में बाघों की गिनती हो रही है। इससे पहले सिर्फ पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में बाघों की गिनती होती थी। बाघों की गिनती के लिए झारखंड को छह अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है। जबकि बाघ के अलग-अलग कॉरिडोर चिन्हित किया गया है। बाघ की मूवमेंट का रिकॉर्ड पलामू टाइगर रिजर्व से गुमला, लोहरदगा और खूंटी होते हुए पश्चिम बंगाल की सीमा और पलामू टाइगर रिजर्व से निकलकर चतरा होते हुए हजारीबाग तक जाने के सबूत मिले हैं। इसी रूट पर अधिकतर कैमरा को लगाया गया है और उसके डाटा को खंगाला जा रहा है।
दिसंबर महीने में बाघों की गिनती शुरू हुई है। गिनती के दौरान वन्य जीव से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारी निकलकर सामने आयी है। तेंदुआ के मूवमेंट की जानकारी पाकुड़ और गोड्डा जैसे जिलों में मिली है। जबकि पलामू टाइगर रिजर्व में बड़ी संख्या में तेंदुआ के मौजूद होने की जानकारी निकलकर सामने आई है। गिनती के दौरान हनी बैजर, भेड़िया, हाथी, हायना के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। सभी के डाटा को एक जगह इकट्ठा किया गया है। डाटा को वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया को भेजी गयी।