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उद्यान विभाग से मिले 4000 फूलों के पौधों से बदली महतो परिवार की किस्मत

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उद्यान विभाग से मिले 4000 फूलों के पौधों से बदली महतो परिवार की किस्मत
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30 डिसमिल जमीन पर झारबेड़ा फूलों की खेती कर मालामाल हो रहे किसान राजेश महतो घाटशिला प्रखंड में हलुदबनी के रहने वाले हैं प्रगतिशील किसान राजेश महतो घाटशिला। घाटशिला प्रखंड के हेंदलजोड़ी पंचायत के हलुदबनी गांव के निवासी राजेश महतो (पिता कृष्ण चंद्र महतो) द्वारा उद्यान विभाग से दिए गए चार हजार झारबेड़ा फूलों की खेती चर्चा का विषय बन चुकी है। राजेश महतो द्वारा बताया गया कि उद्यान विभाग घाटशिला द्वारा उन्हें झारबेड़ा फूलों का पौधा उपलब्ध कराया गया,जिसका खेती लगभग 30 डिसमिल जमीन पर उनके द्वारा किया जा रहा हैं ,वे बताते है की फूलों की खेती में वैज्ञानिक तरीके का प्रयोग कर काफी सकारात्मक प्रगति देखने को मिला है। श्री महतो द्वारा पालीहाउस बनाकर झारबेड़ा के फूलों के पौधों की खेती की गई है। जिससे एक निश्चित सामान्य ताप पौधों को प्राप्त होता है, इसके अलावा ड्रिप इरिगेशन अर्थात टपक पद्घति से सिंचाई की व्यवस्था की गई है, जिससे पानी की समुचित मात्रा पौधों की जड़ों में पहुंचेगा और पानी की खपत भी कम होगी। समय-समय पर उद्यान एवं कृषि विभाग द्वारा महत्वपूर्ण जानकारियां यथा दवाइयां एवं खाद् के प्रयोग को लेकर उन्हें प्राप्त होती है। वे बताते है की झारबेरा का एक फूल 10 से 20 में बिकता है और लगभग सालों भर बिक्री होता है। खासकर शादी ब्याह के मौसम में तो इसकी बहुत मांग होती है ,घाटशिला के बगल में टाटानगर होने के कारण अच्छा बाजार भी उपलब्ध हो गया है। बिक्री के लिए। सबसे खास बात यह है कि उनको झारबेड़ा के फूलों की खेती में ज्यादा परिश्रम और देखरेख की भी जरूरत नहीं करनी पड़ती है। आगे उनका कहना है कि उनके पास पड़ती जमीन और भी उपलब्ध है यदि उद्यान विभाग द्वारा उन्हें गेंदा ,गुलाब के फूलों की खेती के लिए भी पौधा उपलब्ध कराया जाता है तो उनके आमदनी में गुणोत्तर वृद्घि होगी और इस फूलों की खेती और इसके आयस्रोत को देखते हुए गांव के बाकी लोग भी फूलों की खेती करने का विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि विभाग और भी कृषकों को यह अवसर प्रदान करें तो हमारा प्रखंड फूलों की मंडी के रूप में विकसित होगा और यहां के लोगों को बंगाल और झाड़ग्राम का रुख नहीं करना पड़ेगा। स्थानीय तौर पर आय के स्रोत भी बढ़ेगी और कम दाम पर फूलों की खरीदारी स्थानीय लोग कर सकेंगे।
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