Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
वन और पर्यावरण

आइएमडी का अनुमान- इस बार मानसून में औसत से अधिक होगी बारिश

शेयर करें: WhatsApp Facebook X
आइएमडी का अनुमान- इस बार मानसून में औसत से अधिक होगी बारिश
विज्ञापन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय मौसम विभाग (आइएमडी) ने भारत में जून में सामान्य से अधिक वर्षा होने का अनुमान लगाया है, जो दीर्घावधि औसत का 108 प्रतिशत होगी। यह 2025 के दौरान मानसून की शुरुआत का संकेत है, जो 16 वर्षों में सबसे पहले है। आइएमडी के अनुसार, जून में सामान्य से अधिक वर्षा होगी, जो दीर्घावधि औसत का 108 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। 

2024 में भारत में 934.8 मिमी वर्षा हुई, 2023 में 820 मिमी वर्षा हुई थी, जो औसत से 94.4% अधिक थी। कटऊ ने कहा कि पूरे मानसून के दौरान देश में 87 सेमी की दीर्घकालिक औसत बारिश का 106 प्रतिशत बारिश हो सकती है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम रविचंद्रन ने कहा कि इस मौसम में मानसून कोर जोन में सामान्य से अधिक (लंबी अवधि के औसत का 106 प्रतिशत से अधिक) बारिश होने की संभावना है। 

मानसून कोर जोन में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा और आसपास के इलाके शामिल हैं। इस क्षेत्र में ज्यादातर बारिश दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान होती है और यह कृषि के लिए काफी हद तक इस पर निर्भर करता है। उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य बारिश होने की संभावना है, जबकि पूर्वोत्तर में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। 

आइएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि मध्य और दक्षिण भारत में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज किए जाने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) ने बीते सोमवार को कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अपनी सामान्य तारीख से 16 दिन पहले मुंबई पहुंच गया है। 1950 के बाद से पहली बार इसका इतनी जल्दी आगमन हुआ है। मानसून ने शनिवार को केरल में दस्तक दी, जो 2009 के बाद से भारत की मुख्य भूमि पर इतनी जल्दी इसका पहली बार आगमन है। उस साल यह 23 मई को इस राज्य में पहुंचा था। 

दक्षिण-पश्चिम मानसून अभी से एक्टिव! 

दक्षिण-पश्चिम मानसून आमतौर पर एक जून तक केरल में प्रवेश करता है। 11 जून तक मुंबई पहुंचता है और आठ जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लेता है। यह 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से लौटना शुरू कर देता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह से लौट जाता है। 

दक्षिण पश्चिम मानसून के भारत के लिए इतना खास होने की पहली वजह तो ये है कि जून से सितंबर तक की ये मानसूनी बारिश देश में सालाना बारिश का 70% है। यानी देश की पानी की जरूरतें सबसे ज्यादा इसी बारिश के भरोसे पूरी होती हैं। भारत में खेती की 60% जमीन सिंचाई के लिए मानसून के ही भरोसे है। धान, मक्का, बाजरा, रागी और अरहर जैसी खरीफ की फसलें दक्षिण पश्चिम मानसून के भरोसे ही रहती हैं। 

मौसम विभाग ने आगामी कुछ दिनों में केरल, कर्नाटक, तटीय महाराष्ट्र और गोवा के कुछ इलाकों में बहुत से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई है। साथ ही केरल, मुंबई शहर सहित कोंकण, मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों, कर्नाटक के तटीय और घाट क्षेत्रों में आज अत्यंत भारी बारिश की संभावना है।

विज्ञापन

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.

कुल पाठक (Total Visitors): 45,008