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प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित और मानव जीवन को सशक्त बनायेगा प्योरसम

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प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित और मानव जीवन को सशक्त बनायेगा प्योरसम
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एबीएन न्यूज नेटवर्क, चाकुलिया/ जमशेदपुर। जमशेदपुर के चाकुलिया में आज दिनांक 6 फरवरी 2025 को बहरागोड़ा विधायक समीर मोहंती मोहंती, पूर्व विधायक कुणाल षाडंगी, न्यूरो सर्जन डॉ संजय कूमार ने संयुक्त रूप से प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित करने और मानव जीवन को सशक्त बनाने की और कदम बढ़ाते हुए प्योरसम के नये प्लांट का उद्घाटन किया। मौके पर प्योरसम के सीओओ सहित प्रमुख चिकित्सक डॉ संजय कुमार  उपस्थित रहे।  

अपने विस्तार के हिस्से के रूप में प्योरसम ने झारखंड के चाकुलिया में एक नई सीएफओएम उत्पादन सुविधा की नींव रखी है। यह प्लांट रणनीतिक रूप से 20,000 मवेशियों के लिए एक आश्रय के साथ एकीकृत है, जो एक बंद लूप सिस्टम बनाता है जहां गाय के गोबर को प्रीमियम जैविक खाद में परिवर्तित किया जाता है। 100 टन प्रति माह की लक्षित उत्पादन क्षमता के साथ, यह सुविधा स्थानीय समुदायों के लिए स्थिर रोजगार और कौशल विकास के अवसर प्रदान करेगी, जिससे प्योरसम के ग्रामीण सशक्तिकरण के मिशन को और मजबूती मिलेगी। 

प्योरसम एक अग्रणी सामाजिक उद्यम, झारखंड भर में सीमांत और आदिवासी किसानों को सशक्त बनाते हुए, गाय के गोबर को उच्च मूल्य वाले जैविक उत्पादों में बदलकर ग्रामीण कृषि में क्रांति ला रहा है। प्राकृतिक खेती, नवीन जैव उत्पादों और किसान शिक्षा को एकीकृत करके, प्योरसम एक आत्मनिर्भर कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा दे रहा है जो मिट्टी के स्वास्थ्य को बढ़ाता है, फसल की पैदावार में सुधार करता है, और सिंथेटिक/रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता को कम करता है। 

प्योरसम बायोप्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और सीईओ अरविंद त्रिपाठी के नेतृत्व में, संगठन ने छउइ फर्टिलाइजर्स के साथ फसल-विशिष्ट किण्वित जैविक उर्वरक (सीएफओएम) पेश करने के लिए साझेदारी की है - पुनर्योजी खेती में एक सफलता।  

न्यूरो सर्जन डॉ संजय ने कहा कि ऐतिहासिक स्थान से एक ऐतिहासिक कार्य की शुरुआत हो रही है। यह प्रयास सार्थक तभी होगा जब क्षेत्र के किसानों को इसका लाभ आसानी से मिल सके। तकनीक के फायदे बनाते हुए बताया कि कृषि के क्षेत्र में भी विकसित तकनीक से विकसित खेती की जा सके। कृषि में रासायनिक खाद का इस्तेमाल एक गहरी साजिश है। जिसमें भारत के लोग फंस चुके हैं। यदि हम मिट्टी और बीज को विकसित कर दें तो कम पानी में भी बेहतर कृषि कार्य हो सकते है। चाकुलिया से फसल और नसल को बचाने की शुरूआत हुई है। इस प्योरसम इंडिया फाउंडेशन आगे तक ले जाएगी।

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