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वन और पर्यावरण

इस साल देश के कुछ क्षेत्रों का पारा जा सकता है 50 के पार

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इस साल देश के कुछ क्षेत्रों का पारा जा सकता है 50 के पार
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एबीएन सेंट्रल डेस्क। इस वर्ष की फरवरी बीते 122 वर्षों में सबसे गर्म महीना माना गया था, जो वर्ष 1901 के बाद सबसे गर्म महीना था। लेकिन अब हालात और बिगड़ने वाले हैं। मौसम विज्ञान विभाग चेतावनी दे रहा है कि देश के अधिकतर हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पार कर जायेगा, वहीं कुछ जगहों पर पारा 50 पार भी जा सकता है। यह जानकारी गुरुवार को मौसम वैज्ञानिक डॉ एसएन सुनील पांडेय ने दी।

उन्होंने बताया कि इसके बाद करने को कुछ खास बाकी नहीं रहेगा, लोग बीमारी नहीं, बल्कि वेट-बल्ब टेंपरेचर की वजह से खत्म होने लगेंगे। शुरुआत हो भी चुकी है, महाराष्ट्र के नवी मुंबई में रविवार दोपहर एक सम्मान समारोह के दौरान हीटवेव से 11 लोगों की जान चली गयी, जबकि एक की हालत गंभीर बताई जा रही है, वेट-बल्ब थ्रेशहोल्ड के चलते हालात बेकाबू हो सकते हैं।

क्या है ये टेंपरेचर : अगर थर्मामीटर के बल्ब पर कोई गीला कपड़ा लपेटा जाये तो उसकी रीडिंग कम होने लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कपड़ा पारे की गर्मी को सोख लेता है। लेकिन अगर आसपास की हवा नम हो, यानी उसमें पानी की मौजूदगी हो तो कपड़े से पानी के वाष्पीकरण होने की प्रक्रिया काफी धीमी रहेगी इससे थर्मामीटर का पारा वहीं का वहीं बना रहेगा। बिल्कुल यही बात इंसानी शरीर पर भी लागू होती है। अगर शरीर के आसपास मौजूद हवा में नमी हो, तो पसीना सूख नहीं पाता है, इससे तापमान कम नहीं हो पाता है।

पसीना निकलना ही काफी नहीं! :  उन्होंने कहा कि नहीं, वैसे तो शरीर को ठंडा रखने में पसीना काफी काम करता है लेकिन सिर्फ पसीना निकलने से ही शरीर ठंडा नहीं रहता। वाष्पीकरण के जरिए शरीर से निकली गर्मी को सूखना भी चाहिए। हवा में नमी होने पर पसीना निकलता तो है, लेकिन भाप न बनकर शरीर पर ही बना रहता है। इससे तापमान बढ़ने लगता है, जिससे ऑर्गन फेल होने तक का खतरा रहता है।

पारा ऊपर जाने पर क्या होता है : उन्होंने बताया कि हमारे लिए उच्चतम स्वीकार्य वेट-बल्ब टेंपरेचर 35 डिग्री सेल्सियस है। इस मार्कर के ऊपर जाने पर पसीना वाष्पीकृत होने में समस्या आने लगती है, जिससे शरीर का तापमान बढ़ने लगता है और फिर हाइपरथर्मिया की स्थिति भी आ सकती है। यह ऐसे परिस्थिति है, जिसमें शरीर जितनी गर्मी छोड़ सकता है, उससे ज्यादा अवशोषित या पैदा करता है

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