टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) इस नवरात्र में समाज व प्रशासन से कुछ विषयों पर आग्रह करती है। पिछले कई वर्षों से एक परंपरा सी बन गई है कि माता के पंडाल का उद्घाटन करने के लिए नेता व अन्य समुदाय को आमंत्रित किया जाता है। हम सनातन धर्म के मानने वाले लोग यह कैसे कर सकते हैं कि माता के मंदिर का उद्घाटन कोई नेता या विधर्मी करे, यह धर्म आचरण नहीं है। अत: पूजा कमेटियों व समाज से विश्व हिंदू परिषद विनम्र आग्रह करती है कि आप अतिथि को जरूर बुलायें, परंतु पंडाल का उद्घाटन फीता काटकर नहीं, बल्कि उनसे माता की आरती और पूजा करवाकर करायें। इससे समाज में बन रही गलत परंपरा खत्म होगी।
विहिप प्रशासन से आग्रह करती है कि विसर्जन के दिन जैसे परंपरागत विसर्जन होते आ रहा है उसको सुचारू रूप से चलने दे। नियम व कानून का भय दिखाने से समाज में डर का माहौल बनता है। यह धर्मिक आजादी पर प्रतिबंध की तरह है। जैसे अन्य धर्मावलंबियों के पर्व-त्यौहार पर किसी तरह की कोई बंदिश नहीं होती है। ठीक उसी तरह सनातन धर्म को मानने वालों पर भी कोई बंदिश नहीं होनी चाहिए।
मांस और मदिरा की दुकानों को षष्टी के बाद से विजयादशमी तक बंद किया जाना चाहिए। विश्व हिंदू परिषद इसकी मांग करती है। सभी पूजा समितियों से आग्रह है कि अपनी सनातन परंपरा को ध्यान में रखते हुए पंडाल में किसी तरह का अभद्र गाना या गैरधार्मिक गाना न बजाते हुए केवल और केवल धार्मिक गीत बजाएं ताकि समाज में अपने धर्म के प्रति जागृति पैदा हो और अपने लोग धर्म का मर्म समझ सकेंगे। हमारी इस महान पूजा पर गलत बातें नहीं करेंगे। पूजा समितियां भोग वितरण करने के बजाए पूजा पंडाल में अपने समाज के लोगों को बैठा कर भोग खिलाएंगीं तो बेहतर संदेश जाएगा। सामाजिक समरसता का विचार उत्पन्न होगा। विश्व हिंदू परिषद सभी पूजा समितियों से ऐसा आग्रह करती है। संभव हो तो सभी पूजा समितियां पंडाल में घूमने वाले आगंतुकों का तिलक लगाकर स्वागत करें। उक्त जानकारी विहिप के झारखंड प्रांत प्रमुख संजय कुमार (9835138678) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।