टीम एबीएन, रांची। उत्तर प्रदेश की वाराणसी जिला न्यायालय ने ज्ञानवापी मामले पर महत्वपूर्ण फैसला देते हुए ज्ञानवापी स्थित शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन और विग्रहों के संरक्षण को निर्देशित किया है। इस फैसला से समस्त सनातन हिंदू समाज आनंदित, उत्साहित व उल्हासित हैं, यह बात विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री डॉ बिरेंद्र साहू ने कहा। प्रांत मंत्री डॉ बिरेंद्र साहू ने कहा जिला न्यायाधीश डॉ.अजय कृष्ण विश्वेश की न्यायालय में पोषणीयता पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि श्रृंगार गौरी-ज्ञानवापी याचिका में आगे सुनवाई होगी। वहीं मुस्लिम पक्ष की याचिका निरस्त कर दी गई है, यह विदेशी आक्रांताओं पर भारतीय हिंदू संस्कृति की विजय है। डॉ साहू ने कहा, गजनी, गोरी, औरंगजेब, तुगलक, अकबर जैसे आक्रांताओं के द्वारा हमारे अनेकों मानबिंदुओं को क्षति पहुंचाने अथवा लूटने का काम किया गया था, इसका पुनरुद्धार करना हम हिंदू समाज का कर्तव्य बनता है। अपने कर्तव्य को समझते हुए विगत 600 वर्षों से अपने मानबिंदुओं को मूल रूप में प्राप्त करने के लिए हिंदू समाज ने संघर्ष करते आ रहे हैं। यह फैसला इसी कर्तव्य के भविष्य का मार्ग को प्रशस्त करने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि न्यायालय का यह फैसला साबित कर दिया कि मथुरा के श्रीकृष्ण मंदिर सहित भारत के सैकड़ों प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक मान बिंदुओं पर प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट 1991 लागू नहीं होगा, क्योंकि ये पुरातन है, प्राचीन है, जिस पर 15 अगस्त,1947 की स्थिति लागू नहीं हो सकता। डॉ साहू ने फैसला पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा भगवान शिव के अन्यतम भक्त भगवान नंदी के प्रतीक्षा का समय अब पूर्ण होने वाला है। (लेखक विहिप के झारखंड प्रांत मंत्री हैं।)