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कौन होंगे शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के उत्तराधिकारी, आज होगा ऐलान

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कौन होंगे शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के उत्तराधिकारी, आज होगा ऐलान
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एबीएन सोशल डेस्क। द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का निधन रविवार को दोपहर में हो गया है। वह 99 वर्ष के थे। उन्हें आज मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में स्थित परमहंसी गंगा आश्रम में समाधि दी जानी है। उनके निधन के बाद अब उनके उत्तराधिकारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोमवार को ही उनके उत्तराधिकारी की घोषणा की जानी है। लेकिन इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि उनका उत्तराधिकारी कौन बनेगा? शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के उत्तराधिकारी की घोषणा के बाद संत समाज द्वारका पीठ और ज्योतिष पीठ पर फैसला लेगा। इस बीच कहा जा रहा है कि दंडी स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज को द्वारका शारदा पीठ की कमान मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज को ज्योतिषपीठ की कमान सौंपी जा सकती है। ये दोनों ही शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रमुख शिष्य माने जाते हैं। वहीं शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के अंतिम दर्शन के लिए राजनीतिक दलों के नेता भी सोमवार को पहुंचेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ सुबह करीब 11 बजे आश्रम पहुंचकर उनके अंतिम दर्शन करेंगे। वहीं केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल दोपहर 2 बजे झोतेश्वर स्थित परमहंसी आश्रम पहुंच सकते हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के भी पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। आश्रम के अनुसार स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती गुजरात स्थित द्वारका-शारदा पीठ एवं उत्तराखंड स्थित ज्योतिश पीठ के शंकराचार्य थे और पिछले एक साल से अधिक समय से बीमार चल रहे थे। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज 99 वर्ष की आयु में हृदय गति के रुक जाने से ब्रह्मलीन हुए। उन्होंने अपनी तपोस्थली परमहंसी गंगा आश्रम झोतेश्वर में दोपहर 3.21 बजे अंतिम सांस ली। दंडी स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज और दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज को कमान मिल सकती है। शंकराचार्य ने सनातन धर्म, देश और समाज के लिए अतुल्य योगदान किया। उनसे करोड़ों भक्तों की आस्था जुड़ी हुई है। इसमें कहा गया है कि वह स्वतन्त्रता सेनानी, रामसेतु रक्षक, गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करवाने वाले तथा रामजन्मभूमि के लिए लम्बा संघर्ष करने वाले, गौरक्षा आंदोलन के प्रथम सत्याग्रही एवं रामराज्य परिषद् के प्रथम अध्यक्ष थे और पाखंडवाद के प्रबल विरोधी थे। आश्रम के सूत्रों ने बताया, उन्हें नरसिंहपुर के गोटेगांव स्थित उनकी तपोस्थली परमहंसी गंगा आश्रम झोतेश्वर में सोमवार दोपहर करीब 3-4 बजे भू समाधि दी जायेगी। उन्होंने कहा कि वह डायलिसिस पर थे और पिछले कुछ महीनों से आश्रम में अक्सर वेंटिलेटर पर रखे जाते थे, जहां उनके इलाज के लिए एक विशेष सुविधा बनाई गई थी। इसके अलावा, वह मधुमेह से पीड़ित थे और वृद्धावस्था संबंधी समस्याओं से भी जूझ रहे थे।
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