समाज
भागवत कथा का हर प्रसंग मनुष्य के चरित्र को सुधारता है : जया किशोरी
ABN Bureau
•
10 Sep, 2022
•
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टीम एबीएन, लोहरदगा। श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन पूज्या जया किशोरी जी के कार्यक्रम स्थल व्यास मंच में आगमन होते हीं भक्तों के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने पूज्या जयाकिशोरी जी को अंगवस्त्र प्रदान कर एवं पगड़ी पहनाकर अभिनन्द किया। साहू परिवार ने ठाकुर जी की पूजा अर्चना और आरती किया। भजन जय जय राधा रमन, हरी बोल, जय जय राधा रमन, हरी बोल, हरी बोल हरी बोल, हरी बोल हरी बोल, हरी बोल हरी बोल, हरी बोल हरी बोल के साथ श्रीमद्भागवत कथा प्रारंभ की गई। भागवत कथा का प्रत्येक प्रसंग मनुष्य के चरित्र और स्वभाव को सुधारता है। जया किशोरी जी ने कथा वाचन करते हुए बतलायी कि कथा श्रवण करने पर श्री कृष्ण के प्रति प्रेम न हो, पाप से घृणा ना जागे, धर्म के प्रति प्रेरित ना हो तो ये समझना कि आपने कथा सुनी ही नहीं। पाप, कर्मों का नाश करती है कथा, प्रेम को बढ़ाती है कथा। पहले हम अपने मन को सुधारें, फिर जगत को सुधारने निकले। अपने चरित्र से यदि अपनी आत्मा को संतोष मिले तभी मानो कि तुम्हारा स्वभाव सुधरा है।भगवान की रासलीला का वर्णन करते हुए उसने कहा कि भगवान की रासलीला भक्त और भगवान का मिलन आत्मा और परमात्मा का मिलन है। इस रासलीला को कामदेव असफल नही कर सका। जिस रासलीला को देखने भगवान शंकर गोपी बनकर के आए हो उस अध्यात्मिकी पराकाष्ठा वाली भगवान की रासलीला का इस भौतिक युग में मजाक उड़ाने वाले हमारी आस्था संस्कृति और देश का मजाक बना रहे है। रासलीला का अर्थ ना जानने वाले मूर्ख है। उसके अर्थ का अनर्थ करने वाले पापी है। परमपिता परमेश्वर ने हजारों सालों से तपस्या करने वाले बड़े-बड़े ऋषियों को वरदान दिया था इस अवतार में वे गोपी बनेगी ओर भगवान के साथ साथ भक्ति, नृत्य अर्थात रासलीला करेंगे। कथा प्रसंग में मथुरा से कृष्ण जी का आमंत्रण, कृष्ण का मथुरा जाना और कुब्जा का उद्धार करना तथा कंस वध करने का वर्णन किया। सांदीपनि आश्रम उज्जैन में शिक्षा अर्जन, वहीं सुदामा से मैत्री का वर्णन करते हुए उसने कहा कि जीवन में दरिद्रता का कारण वही बनता है, किसी के हक को खाना। भगवान के प्रति भक्ति रखने वाले भी छोटे से अपराध का बड़ा दुख प्राप्त करते है तो हम मनुष्य किस गिनती में आते है हमें गोपी की तरह प्रेम, नंद बाबा की तरह दुलार और यशोदा की तरह वात्सल्य रखना होगा। भगवान को किसी भी रूप में मानो परंतु भगवान से प्रेम करो।
उद्धव प्रसंग में श्रीकृष्ण ने उद्धव की ज्ञान भक्ति के अंहकार को दूर किया और भगवान कृष्ण के प्रति गोपियों की प्रेम को दिखाया। यही भक्ति अंत में रूक्मणि और श्रीकृष्ण की विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए आपने कहा कि पति तो पति ही होता है, वो पति परमेश्वर तभी बन सकता है जब परमेश्वर जैसा काम करे पत्नी संग सच्ची प्रेम करें। इस दौरान रुक्मणी विवाह की सुंदर सी झांकी प्रस्तुत की गई।जया किशोरी ने कहा श्रीकृष्ण के संग रुक्मिणी विवाह धूमधाम से रचाया गया। इस अवसर पर कथा स्थल में विशेष धुन बजाते गए। पंडाल परिसर में बारात निकली।
कथा वाचिका जया किशोरी ने श्रीकृष्ण- रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि महारास में पांच गीत अध्याय हैं।
जिसे भागवत के पंच प्राण भी कहते हैं। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है, वह भवपार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, ऊधो-गोपी संवाद, द्वारका की स्थापना एवं रुक्मिणी विवाह के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया।
विवाह उत्सव में भगवान कृष्ण की बारात धूमधाम से निकाली। गणेश मंडल के युवाओं ने भगवान कृष्ण की बरात में भजनों पर खूब नृत्य किया। कथा पंडाल में पहुंचकर कृष्ण रुक्मिणी विवाह रचाया गया।
श्रीमद्भागवत कथा कार्यक्रम में स्थानीय सांसद सुदर्शन भगत, झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर, मनिका विधायक रामचंद्र सिंह, साहू परिवार से शैफाली साहू, अरुणा साहू, उदय शंकर प्रसाद, धीरज प्रसाद साहू, सरिता साहू, मनु साहू, राहुल साहू, वंदना साहू, दुर्गेश साहु, हर्षित साहू, रुचि साहू, राजश्री साहू, हंसा साहू, सबिता साहु, सौरभ साहु, शेरी मुनी साहू, मिली साहु, रितेश साहू, नवीन गुप्ता, दिनेश साहू, मदन मोहन शर्मा, सचिदा चौधरी, दिल्ली से राजश्री कुमार, अजय महासेठ, शालिनी महासेठ रांची डॉ अनूप साहू, अशोक यादव, सुखैर भगत, राजेन्द्र खत्री, ओमप्रकाश सिंह, मनोज प्रसाद, हनुमान राजगड़िया, संदीप कुमार, अरुण राम, राहुल कुमार, बलवीर देव, कृष्ण मोहन केशरी, कैलाश केशरी, उर्मिला केशरी, सतीश जयसवाल, राकेश सिंह, अनिता पोद्दार गुस्सा में सजा 10,000 से हाथी भागवत प्रेमियों की मौजूदगी और जयकारे ने श्रीमद् भागवत कथा के छठवें को ऐतिहासिक बना दिया।
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