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पारंपरिक विधि-विधान से मनी सनातन ब्रह्म भगवान श्रीकृष्ण की जयंती
ABN Bureau
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21 Aug, 2022
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टीम एबीएन, रांची। शनिवार को श्रीकृष्ण प्राकट्य दिवस में नक्षत्र की प्रधानता को देखते हुए शास्त्र अनुमोदित श्रीसंप्रदायाचार्यों की परंपरा के अनुसार श्रीलक्ष्मीवेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में व्रत- महोत्सव मना।
श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में तिथि की प्रधानता न होकर नक्षत्रकी प्रधानता है। चंद्रवंश में श्रीभगवान प्रकट हुए, चंद्रमा की प्रिय पत्नियों में से एक रोहिणी है, इसलिए श्रीभगवान ने रोहिणी नक्षत्र का चयन किया है।
जन्माष्टमी -व्रत समस्त व्रतों में उत्तम माना गया है। यह जय और पुण्य प्रदान करने वाली है। इस अवसर पर ब्रह्ममुहूर्त में परात्परब्रह्म परमात्मा श्रीलक्ष्मीवेंकटेश्वर का विश्वरूपदर्शन, सुप्रभातम और मंगलाशासन हुआ। फिर नित्याराधन के बाद दूध, दही, हल्दी, चंदन, शहद डाभयुक्त जल और गंगाजल से महाभिषेक हुआ। इसके बाद महाआरती और श्रुति स्मृति एवं उपनिषद के मंत्रों से स्तुति की गई। फिर नैवेद्य भोग लगा।
दिव्य सुवासित पुष्पों से सजे हुए पालने पर भगवान श्रीवेंकटेश- कृष्ण रूपमें, श्रीश्रीदेवी रुक्मिणी के रूप में और श्रीभूमिदेवी राधिका स्वरूप में सज- धज कर झूला झूल रहे थे। रात्रि 8 बजे से श्रीकृष्णनाम संकीर्तनम्, भजन और श्रीविष्णुसहस्त्रनाम का सामूहिक पाठ हुआ तथा रात्रि 9 बजे आराधना, महाआरती एवं भांति -भांति के स्तोत्रों से स्तवन हुआ। सूजी हलवा, फल और मेवा का भोग चढ़ा।
महाभिषेक के यजमान : प्रदीप कुमार- उमा नारसरिया जबकि खिचड़ी महाप्रसाद निवेदन किया : ओम प्रकाश -मंजू गाड़ोदिया दोनों ही यजमान रांची निवासी हैं।
अर्चक : सत्यनारायण गौतम, गोपेश आचार्य और नारायण दास ने महानुष्ठान को विधिवत सुसंपन्न कराया। इसके पूर्व झारखंड निवासियों के लिए सुख- शांति, आयु-आरोग्य और समृद्धि की कामना की।
कार्यक्रम में मंदिर संचालन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष श्रीराम अवतार नारसरिया, अनूप अग्रवाल, प्रदीप नारसरिया, विनय धरनीधरका, रंजन सिंह, सुशील लोहिया, राजेश सुलतानिया आदि का मुख्य भूमिका रहा।
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