टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 28 जुलाई को विद्या भारती मेमोरियल इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी तुपुदाना में डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग के सिविल डिपार्टमेंट के छात्रों को आचार्य मुक्तरथ जी ने प्राणायाम और मेडिटेशन का अभ्यास कराया। इन छात्रों को कपालभाति और नाड़ीशोधन के साइंटिफिक लाभ को बताया गया। कपालभाति की क्रिया में जब हम फोर्सफुल्ली श्वांस को छोड़ते हैं तो वह फ्रंटल मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है जिससे एकाग्रता बढ़ती है। पिट्यूटरी ग्रन्थि स्वस्थ बनता है स्मरण शक्ति तेज होती है और आज्ञा चक्र का जागरण होता है। वहीं अनुलोम-विलोम की क्रिया जिसे नाड़ीशोधन प्राणायाम कहा जाता है। इस क्रिया में जब हम होशपूर्वक बायें नाशिका से श्वांस लेकर दायें नाशिका से छोड़ते हैं और फिर दायें नाशिका से श्वांस लेकर बायें से छोड़ते हैं तो यह हमारे पूरे नाड़ीतंत्र पर प्रभाव डालता है और खास कर मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को स्वस्थ बनाता है, उसके तनाव को खत्म करता है जिससे कि मस्तिष्क की क्षमता में वृद्धि होती है। मन नियंत्रित होता है और सुषुम्ना नाड़ी में प्राण का प्रवाह तेज होता है। यह भी आज्ञा चक्र को जागृत करता है। दोनों ही प्राणायाम अवसाद को दूर करता है। चिंता और क्रोध को दूर करता है और मानसिक रोग से हमें सुरक्षित रखता है।