झारखंड
भारतीय मिसाइल प्रोग्राम के जनक थे अब्दुल कलाम : रथिन भद्रा
ABN Bureau
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27 Jul, 2022
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एबीएन सेंट्रल डेस्क। पुण्यतिथि पर लोगों ने पूर्व राष्ट्रपति और ‘भारत रत्न’ से समानित एपीजे अब्दुल कलाम को नमन किया। 27 जुलाई 2015 को उनका निधन हो गया था। उन्होंने मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग के बेथानी अस्पताल में अंतिम सांसें ली थी। दरअसल, 84 साल के कलाम उन दिनों पूर्वोत्तर के दौरे पर थे। जहां अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें शिलॉन्ग के बेथानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ‘मिसाइल मैन’ नाम के लोकप्रिय कलाम 2002 से 2007 के बीच देश के राष्ट्रपति रहे। वे ऐसे पहले वैज्ञानिक थे, जिन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली। वे बच्चों के बीच भी बेहद लोकप्रिय रहे। 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वर में जन्मे कलाम की कहानी ग्रामीण लड़के से राष्ट्रपति भवन की यात्रा तक ही सीमित नहीं थी। यह ऐसी शख्सियत की कहानी है जिसने गरीबी में भी अपने सपनों को मरने नहीं दिया और कामयाबी की नई गाथा लिखी। उक्त बातें समाजसेवी रथिन भद्रा ने कही। वे डॉ कलाम की पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एपीजे अब्दुल कलाम को भारतीय मिसाइल प्रोग्राम का जनक माना जाता है। उनका पूरा नाम डॉक्टर अबुल पाकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम था।
इंजीनियरिंग की शिक्षा के लिए उन्होंने मद्रास इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी में दाखिला लिया। वहां इन्होंने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। 1962 में अब्दुल कलाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में आए और फिर प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह बनाने का श्रेय हासिल है। अब्दुल कलाम भारत के मिसाइल कार्यक्रम के जनक माने जाते हैं। कलाम ने 20 साल तक इसरो में काम किया और और फिर डीआरडीओ के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार की भूमिका भी निभाई। कलाम की अगुवाई में ‘अग्नि’ और ‘पृथ्वी’ जैसी मिसाइलों को स्वदेशी तकनीक से बनाया। उनका निधन पूरे भारत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। जिसकी भरपाई सदा असंभव है। इस महान सख्शियत को शत शत नमन...। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।
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