एबीएन सोशल डेस्क। रामकथा क्या है... जैसे प्रश्न का उत्तर किताबों से ज्यादा लोक व्यवहारों में खोजा जाना चाहिए। ऐसा मानना है भगवान श्रीराम के जीवन पर शुरू हुए विश्व के पहले वर्चुअल विद्यालय स्कूल आॅफ राम का। स्कूल आॅफ राम, राम कहानी से जीवन प्रबंधन के गुर सिखाएगा। रामकथा का रिश्ता सीधे लोकमानस से है, उसके सुख-दु:ख, आस-निरास से है। रामकथा क्या है जैसे प्रश्न का उत्तर किताबों से ज्यादा लोक व्यवहारों में खोजा जाना चाहिए। ऐसा मानना है भगवान श्रीराम के जीवन पर शुरू हुए विश्व के पहले वर्चुअल विद्यालय स्कूल आॅफ राम का। स्कूल आॅफ राम, राम कहानी से जीवन प्रबंधन के गुर सिखाएगा। स्कूल आॅफ राम के संस्थापक, संयोजन काशी हिंदू विश्वविद्यालय में अध्यनरत, विद्या भारती के पूर्व छात्र प्रिंस तिवाड़ी का कहना है की पहले लोग एक-दूसरे का अभिवादन, प्रणाम और नमस्कार की जगह राम-रामजी या जै रामजी की जय सियाराम कहकर किया करते थे। अभिवादन में जै रामजी और कुशलक्षेम के रूप में अपनी-अपनी राम कहानी का अर्थ समझ आता है। इसका मतलब यह होता है कि राम स्मरणीय है, इस हद तक कि दो जन जब आपस में मिलें या भेंट करें तो उनकी मुलाकात की शुरूआत रामनाम से हो। दूसरा अर्थ यह होता है कि राम की कोई कहानी है- ऐसी कहानी जिससे व्यक्ति की आपबीती का कोई अनोखा रिश्ता है। ऐसा रिश्ता कि राम की कहानी कहने का मतलब किसी से अपनी आपबीती कहना हो जाता है।
16 जनवरी से प्रारंभ होने वाले इस कोर्स में 13 जनवरी तक आवेदन संभव : प्रिंस ने कोर्स के सबंध में बताया कि रामायण की इन्हीं लोककथाओं को जीवन प्रबंधन का आधार बनाकर स्कूल आॅफ राम ने एक कोर्स का प्रारूप तैयार किया है। जिसमें प्रतिदिन रामायण से जुड़ी किसी एक प्रेरणादायक कहानी से जीवन प्रबंधन का एक गुर लोगों को सिखने को मिलेगा। इस कोर्स का हिस्सा कोई भी बन सकता है। कोर्स 16 जनवरी से शुरू होगा, जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया 13 जनवरी से शुरू हो रही है। यह कोर्स 101 दिन तक वर्चुअल ही संचालित होगा।