Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
समाज

हृदय के द्वार खोलती द काश्मीर फाइल्स...

शेयर करें: WhatsApp Facebook X
हृदय के द्वार खोलती द काश्मीर फाइल्स...
विज्ञापन
एबीएन एडिटोरियल डेस्क (अमरेंद्र पांडेय)। आज दोपहर बाद कश्मीर फाइल्स देखने गया। कला, नाटक, ड्रामा, थियेटर का एक अपना दृष्टिकोण होता है। सामान्य आमने सामने की झड़प में जो हीरो आधी मिनट में हांफ जाए, वह भी फ़िल्म में पांव घुमाकर धरती पर मार दे तो पचास सौ आदमी तो चारों तरफ उड़ उड़कर जा गिरेंगे। सीता वियोग में प्रभु श्रीराम उतने नहीं रोए होंगे जितने स्टेज पर नाटक में श्रीराम बने कलाकार रोते हैं चीख चीख़कर। ड्रामे में राक्षस बनने वाला व्यक्ति इतना हंसता है कि संवाद भी सुनाई नहीं देते उसके चैलेंज से कह रहा हूं कि एक साधारण से बांस के बने धनुष पर प्रत्यंचा न चढ़ा पाएंगे प्रभास। लेकिन बाहुबली में तीन-तीन बाण एक साथ चला रहे हैं। यानी कई हज़ार नाटक फिल्में आदि देखने के बाद सौ बातों की एक बात यह कह रहा हूं कि सबकुछ बहुत बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जाता है। लेकिन मेरे तमाम देखे जाने हुए में द काश्मीर फाइल्स पहली ऐसी फ़िल्म है जो बहाव के विपरीत गई है। यानी कश्मीर में हिंदुओं पर जो गुजरा। उनके ऊपर गुजरी यातनाएं। डर से थर थर कांपते कलेजे। बलात्कर की पीड़ा और चीखों से गूंजता अम्बर। घरों से उठती लपटें। मुर्गे की तरह भुने हुए गोश्त बनी पड़ी हिंदुओं की लाशें। छोटे बच्चों से कुकर्म के बाद हत्याएं। अपने ही देश में घरों से बेघर लाचार हिंदू। उस हैवानियत को बढ़ा चढ़ाकर दिखाना तो दूर। फ़िल्म उसका एक प्रतिशत भी दिखा पाने में मुश्किल से समर्थ हुई है। लेकिन यह एक प्रतिशत जरूर देखना चाहिए।।किसी को उंगली भर शहद चटा दो तो शहद के भरे ड्रम की कल्पना कर सकता है। किसी को एक मिर्च खिला दो तो पूरे ढेर का तीखापन पता चल जाता है। किसी को कील या पिन चुभो दो तो वह जान पाएगा। उस शरीर की पीड़ा जिसमें बिना गिनती के धंस गई न जाने कितनी बुलेट्स किसी की उंगली लौ पर रखवा दो तो पूरा शरीर लपटों में भस्म होने की पीड़ा अनुभूत कर सकता है कि वह कैसी होगी?? आपका भूतकाल द काश्मीर फाइल्स में चीख रहा है। आपका भविष्य आपकी तरफ उंगली किए खड़ा है और शंखनाद कर रहा है कि नहीं चेते तो अगले तुम सपरिवार फ़िल्म देखें। दोस्तों को प्रेरित करें। बाहर आकर जब बच्चे यह एक प्रतिशत देख चुके हों तब उन्हें 100 प्रतिशत के बारे में बताएं। यह फ़िल्म हृदय के द्वार खोल देगी। आप जो कहेंगे सीधा अंदर जाएगा। वामपंथी और कामपंथी ने कितने कमीने होते हैं और बच्चों का कैसे ब्रेनवॉश करते हैं यह बहुत ग़जब दिखाया है। चित्र पुराना है लेकिन कश्मीर फाइल्स देखकर आंखों की हालत यही थी।
विज्ञापन

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.

कुल पाठक (Total Visitors): 52,848