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चालीसा धर्म पत्र-2022 का थीम है : पश्चाताप करो और सुसमाचार में विश्वास करो...

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चालीसा धर्म पत्र-2022 का थीम है : पश्चाताप करो और सुसमाचार में विश्वास करो...
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टीम एबीएन, रांची। रांची महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो एसजे तथा सहायक बिशप थियोडोर मसकरेन्हस एसएफएक्स ने शुक्रवार को संयुक्त रुप से ख्रीस्त विश्वासियों तथा धर्मसंघी भाईबहनों के लिए चालीसा धर्म पत्र-2022 जारी कर 02 मार्च को राख बुधवार (ऐेश वेडनेसडे) से शुरु होने वाले चालीसा (लेंट) महाउपवास काल के आध्यात्मिक गतिविधियों और तपस्या उपवास की जानकारी दी है। इस चालीसा घर्मपत्र का थीम पवित्र बाइबल से उद्धृत है:- पश्चाताप कर और सुसमाचार में विश्वास करो (मारकुस 1:15)। बिशपद्वय ने इस चालीसा धर्मपत्र को जारी करते हुए तमाम पुरोहितों को निदेश दिया है कि 02 मार्च से यह धर्मपत्र सभी पवित्र मिस्सा में विश्वासियों को पढ़कर सुनाया जाए और उन्हें चालीसा के प्रति आध्यात्मिक रुप से जागरुक व सक्रिय करें। महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो व बिशप थियोडोर मसकरेन्हस ने जारी चालीसा धर्म पत्र में संयुक्त रुप से पुरोहित भाईयों, धर्मसंघी भाईयों व बहनों तथा समस्त ख्रीस्त विश्वासियों को संबोधित करते हुए कहा है कि दो मार्च से हम सभी पुन: एक और चालीसा का आरंभ कर रहे है। बिशपद्वय ने चालीसा की इस अवधि को आशा तथा ख्रीस्तीय जीवन पर मनन करने का समय बताया। कहा कि सभी ख्रीस्त विश्वासियों के लिए यह समय आध्यात्मिक नवीनीकरण का और व्यक्ति तथा कलीसिया के लिए ईश्वरीय कृपा का है। उन्होने कहा कि सि वर्ष जब धर्मसभा की प्रक्रिया प्रगति में है इस चालीसा काल को एसा समय बनाएं जहां हम एक दूसरे को विम्रतापूर्वक सुन सकें और ईश्वरीय प्रेम में एक साथ चल सकें। प्रार्थना करें कि चालीसे की इस अवधि में कृपा की नदी और बहुतायत से बहे और हम सभी इस नदी में अपने आप को धोकर साफ करे। जारी चालीसा धर्मपत्र में बिशपद्वय ने मसीहियों के ख्रीस्तीय और आध्यात्मिक जीवन के विकास के लिए चालीसा साधनाओं के पालन का सुझाव दिया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि चालीसा ईश्वर के राज्य की घोषणा है। जिसमें ख्रीस्त विश्वासियों को पवित्र बाईबल पढने के लिए आमंत्रण है। जिसमें खासकर रविवारीय पाठों को जरुरत पढें। इसक्रम में बिशपद्वय ने बताया कि हमारा रविवारीय प्रवचन हिंदी में और गाना के रुप में भजन स्तोत्र रांची महाधर्मप्रांतीय यू ट्यूूब चैनल में उपलब्ध है। इस चालीसे काल काल में हम लोग महाधर्माध्यक्ष फेलिक्सटोप्पो के द्वारा प्रत्येक दिन दैनिक पाठ पर आधारित संक्षिप्त मनन चिंतन अपलोड करेंगे। अगर इस चैनल को सब्सक्राइब कर बेल आईकन को क्लीकि करेंगे तो जब भी नयी वीडियो अपलोग की जाएगी तो सब्सक्राइब करने वालों को तुरंत इसका संदेश मिल जाएगा। उक्त धर्मपत्र में यह भी उल्लेख है कि चालीसा उपवास करने का समय है। संत लियो ने लिखा है ख्रीस्तीयों कोजो काम सब समय करना है उसे उन्हें अभी और अधिक उत्साह के साथ करना चाहिए ताकि प्ररितो द्वारा चालीसा उपवास का जो आनंदि लिया गया था वह मात्र भोजन के त्याग से नहीं लेकिन पापों के परित्याग से पूरा हो सके। अपनी बुरी आदतों और घिनौने प्रवृतियों को उखाड़ फेंकने का प्रयास करे। खासकर आलस्य, निंदा, दूसरों के प्रति लंबे समय तक घृणा व क्रोध रखना, पूर्वाग्रह, झूठ बोलना और किसी भी प्रकार का आत्मसंयम रहित भोग बिलास का परित्याग करें। उक्त चालीसा धर्म पत्र से ख्रीस्त विश्वासियों को यह भी कहा गया है कि गत वर्ष की तरह इस साल भी हम यह सोचें कि प्राय: हम किन चीजों के लिे पैसे खर्च करते है। पूरे परिवार को आमंत्रित करते हैं कि वे एक साथ आकर कुछ आराम और सुख सु्विधाओं का त्याग कर बचत करे तथा भूखमरी से लड़ने के लिए आयोजित अभियान लिए उदारतापूर्वक सहयोग करें ताकि जरुरतमंद लोगों की मदद की जा सके। बिशपद्वय ने जारी धर्मपत्र के माध्यम से तमाम मसीही विश्वासियों से अनुरोध करते हुए कहा है कि अब आवाम साधारण जीवन की ओर वापस लौट रहे है। ऐेसे में आप सभी गिरजाघरों व संस्कारों की ओर वापस जाएं। चालीसा काल के साधनाओं विशेषकर दैनिक मिस्सा बलिदान, क्रूस रास्ता, रोजरी माला विनती, बाईबल पाठ और पुण्य सप्ताह की धर्मविधि के द्वारा अपने विश्वास को मजबूत करें। इस पुण्य अवधि में पापस्वीकार संस्कार ग्रहण करे और प्रत्येक पल्ली और धर्मसंघी संस्थाओं से निवेदन है कि वे विश्वासियों के लिए इस प्रकार के अवसर उपलब्ध कराएं। यह भी बताया कि पारंपरिक चालीसा की प्रार्थना, उपवास, दान जैसी साधनाएं मसीहियों के आाध्यात्मिक जीवन और आध्यात्मिक बंधन को मजबूत बनाती है। प्रार्थना को प्रत्त्यक दिन के लिए जीवन रेखा है, जो हमें हमारे सृष्टिकर्ता, मुक्तिदाता और ईश्वर जो हमें प्यार करता है से हमें जोड़े रखता है। उपवास रा मतलब अन्न जल त्याग कर भूखे रहने का नहीं बल्कि चालीसा में हमारी भूख भोजन से बढ़कर ईश्वर के वचन के लिए होनी चाहिए। इसमें दान देना भी हमारी मदद करता है। धर्मग्रंथ में यह भी उल्लेख है कि दान देने की प्रक्रिया हमारे पापों के लिए प्रायश्चित करता है। किसी भी प्रकार का पुण्य काम एक प्रकार कार दान है।
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