एबीएन डेस्क (संतोष पाण्डेय)। माघ मास की पूर्णिमा तिथि गंगा स्नान के लिए सबसे पवित्र दिन है। माघ पूर्णिमा पर माघ स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। माघ महीने में गंगा स्नान करने, विष्णु पूजा करने और खिचड़ी खाने का विशेष प्रावधान बनाया गया है। इस बार माघ पूर्णिमा 16 फरवरी 2022 को है। माघ माह में चलने वाला यह स्नान पौष मास की पूर्णिमा से आरंभ होकर माघ पूर्णिमा तक होता है। लोग करते हैं कल्पवास
तीर्थराज प्रयाग में कल्पवास करके त्रिवेणी स्नान करने का अंतिम दिन माघ पूर्णिमा ही है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार माघ स्नान करने वाले मनुष्यों पर भगवान विष्णु प्रसन्न रहते हैं तथा उन्हें सुख-सौभाग्य, धन-संतान और मोक्ष प्रदान करते हैं। मघा नक्षत्र के उदय होने से माघ पूर्णिमा की उत्पत्ति होती है। मघा नक्षत्र को श्रीविष्णु जी का हृदय कहा जाता है।
गंगा स्नान की विधि : माघ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है।
ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि के साथ-साथ उसके सभी रोगों का नाश होता है।
माघ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और उन्हें प्रणाम करें।
इसके बाद ह्यॐ घृणि सूर्याय नम:ह्ण इस मंत्र का 108 बार जाप करें।
माघ पूर्णिमा व्रत का संकल्प लें और काले तिल से अपने पितरों का तर्पण करें और फिर हवन करें।
माघ पूर्णिमा व्रत के दौरान किसी से झूठ बोलने, किसी पर क्रोध करने किसी के बारे में अप शब्द बोलने से बचें।
माघ मेला और कल्पवास : तीर्थराज प्रयाग (इलाहाबाद) में हर साल माघ मेला लगता है, जिसे कल्पवास कहा जाता है। इसमें देश-विदेश से श्रद्धालु शामिल होते हैं। प्रयाग में कल्पवास की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कल्पवास का समापन माघ पूर्णिमा के दिन स्नान के साथ होता है। माघ मास में कल्पवास की बड़ी महिमा है। इस माह तीर्थराज प्रयाग में संगम के तट पर निवास को कल्पवास कहते हैं।