एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 11वीं सदी के वैष्णव संत श्री रामानुजाचार्य की स्मृति में यहां 216 फुट ऊंची स्टैच्यू आॅफ इक्वैलिटी प्रतिमा का अनावरण कर इसे राष्ट्र को समर्पित किया। इससे पहले, प्रधानमंत्री ने श्रीरामनगर स्थित रामानुजाचार्य के मंदिर परिसर स्थित एक यज्ञशाला में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा अर्चना की।
मंदिर की परिक्रमा भी की : उन्होंने परिसर में बने 108 दिव्य देशम (सजावटी रूप से नक्काशीदार मंदिर) की परिक्रमा भी की। यह दिव्य देशम स्टैच्यू आॅफ इक्वैलिटी के चारों ओर बने हुए हैं। स्टैच्यू आॅफ इक्वैलिटी का उद्घाटन, रामानुजाचार्य की वर्तमान में जारी 1000वीं जयंती समारोह यानी 12 दिवसीय श्री रामानुज सहस्राब्दि समारोह का हिस्सा है। कार्यक्रम के दौरान संत रामानुजाचार्य की जीवन यात्रा और शिक्षा पर थ्रीडी प्रजेंटेशन मैपिंग का भी प्रदर्शन किया गया।
पंचधातु से बनी है प्रतिमा : यह प्रतिमा पंचधातु से बनी है जिसमें सोना, चांदी, तांबा, पीतल और जस्ता का एक संयोजन है और यह दुनिया में बैठी अवस्था में सबसे ऊंची धातु की प्रतिमाओं में से एक है। यह 54-फुट ऊंचे आधार भवन पर स्थापित है, जिसका नाम भद्रवेदी है। इस परिसर में वैदिक डिजिटल पुस्तकालय और अनुसंधान केंद्र, प्राचीन भारतीय ग्रंथ, एक थिएटर, एक शैक्षिक दीर्घा हैं, जो संत रामानुजाचार्य के कई कार्यों की याद दिलाते हैं। श्री रामानुजाचार्य ने राष्ट्रीयता, लिंग, नस्ल, जाति या पंथ की परवाह किए बिना हर इंसान की भावना के साथ लोगों के उत्थान के लिए अथक प्रयास किया था।