- छोटी दिवाली आत्म मंथन सकारात्मक सोच और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है : संजय सर्राफ
एबीएन सोशल डेस्क। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने कहा है कि प्रत्येक पर्व का धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है। छोटी दिवाली, जिसे नरक चतुर्दशी, नरक चौदस और रूप चौदस भी कहते हैं, विशेष स्थान रखती है। छोटी दीपावली 7 नवंबर दिन शनिवार को मनाई जाएगी।
नरक चतुर्दशी कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार नरकासुर नामक अत्याचारी असुर ने देवताओं और ऋषियों को आतंकित कर रखा था। उसने अनेक कन्याओं को बंदी बना लिया था और भय फैलाया था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने पत्नी सत्यभामा के सहयोग से नरकासुर का वध किया और बंदी महिलाओं को मुक्त कराया।
इस विजय से अत्याचार का अंत हुआ तथा संसार को भय से मुक्ति मिली। इसी घटना की स्मृति में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी मनाने की परंपरा प्रचलित हुई। विभिन्न क्षेत्रों में कथा और पूजा-पद्धति के विवरण में अंतर मिलता है। इस दिन प्रातः सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान की परंपरा है। श्रद्धालु तेल और उबटन लगाकर स्नान करते हैं।
इसे शरीर और मन की शुद्धि तथा नकारात्मकता के त्याग का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण यह रूप चौदस भी कहलाता है। घरों की सफाई कर दीपक जलाए जाते हैं, पूजा-अर्चना होती है और यमदेव के निमित्त दीपदान भी किया जाता है। कई परिवार भगवान श्रीकृष्ण और हनुमानजी की आराधना करते हैं।
दीपों की पंक्तियां घर-आंगन में मंगलमय वातावरण बनाती हैं। छोटी दिवाली का महत्व धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। यह संदेश देती है कि अन्याय, अहंकार, क्रूरता और भय चाहे कितने शक्तिशाली हों, सत्य, साहस और सदाचार के सामने टिक नहीं सकते।
बाहरी स्वच्छता के साथ मन के विकारों को दूर करना भी आवश्यक है। समाज में प्रेम, करुणा, सहयोग और सद्भाव का दीप जलाना ही इस उत्सव की सार्थकता है।आज जब समाज अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है, छोटी दिवाली आत्ममंथन, सकारात्मक सोच और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
आइए, इस पर्व पर अपने घर के साथ हृदय को भी प्रकाशमान करें,जरूरतमंदों की सहायता करें और पर्यावरण के प्रति सजग रहते हुए सुरक्षित ढंग से दीपोत्सव मनाएं। लोकमंगल का संकल्प लेते हैं। यही छोटी दिवाली का सच्चा उद्देश्य और समसामयिक संदेश है।