Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
लाइव: 21
होम ई-पेपर देश झारखंड खेल समाचार राज काज कानून व्यवस्था करियर बिजनेस वर्ल्ड हेल्थ विचार ज्ञान विज्ञान समाज वन और पर्यावरण मनोरंजन बिहार विज्ञापन
समाज

नहीं रहे बिहार-झारखंड के प्रसिद्ध धर्मगुरु हठयोगी जी महाराज, शोक की लहर

शेयर करें: WhatsApp Facebook X Back to ePaper
नहीं रहे बिहार-झारखंड के प्रसिद्ध धर्मगुरु हठयोगी जी महाराज, शोक की लहर
विज्ञापन
  • 85 वर्ष के उम्र में ली अंतिम सांस, लंबे समय से चल रहे थे बीमार 
  • हठयोगी जी महाराज ने पत्थलगडा के लिए दिए थे अमूल्य योगदान 
  • राजकीय मध्य विद्यालय पत्थलगडा में बतौर शिक्षक के रूप में दिये थे सेवा 
  • हठयोगी जी महाराज के नेतृत्व में ही लेम्बोईया पहाड़ी पर पहली बार पर हुआ था रूद्र महायज्ञ का आयोजन 
  • हठयोगी जी महाराज के निधन से धार्मिक और आध्यात्मिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति : बासुदेव तिवारी 

चेतन पाण्डेय  

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पत्थलगडा (चतरा)। बिहार-झारखंड के प्रसिद्ध धर्मगुरु विश्वंभर नाथ उर्फ हठयोगी जी महाराज का आकस्मिक निधन हो गया है। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। 85 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। धर्मगुरु के आकस्मिक निधन से चतरा व हजारीबाग जिले में शोक की लहर है। हठयोगी जी महाराज के असामयिक निधन की खबर से चतरा जिले के पत्थलगडा प्रखंड वासी शोकाकुल हैं। गौरक्षणी चतरा निवासी हठयोगी जी महाराज धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखते थे। 

वे पत्थलगडा प्रखंड मुख्यालय स्थित राजकीय मध्य विद्यालय में शिक्षक के रूप में भी सेवा दे चुके थे। उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में पत्थलगडा में दो महायज्ञ का आयोजन किया गया था। लेंबोईया मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष युगेश्वर दांगी ने बताया कि योगी जी महाराज ने पत्थलगडा प्रखंड मुख्यालय और लेंबोईया पहाड़ी स्थित मां भगवती मंदिर परिसर में आयोजित महायज्ञ में आचार्य की भूमिका निभायी थी। 

उनके निधन को क्षेत्र के धार्मिक और आध्यात्मिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है। मंदिर प्रबंधन समिति के सचिव एवं पूर्व मुखिया बासुदेव तिवारी व अन्य ने गहरा शोक व्यक्त करते कहा कि हठयोगी जी महाराज पत्थलगडा के लिए अमूल्य योगदान दिए थे। शिक्षा से लेकर धार्मिक आयोजनों में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। हठयोगी जी महाराज लंबे समय से बीमार चल रहे थे। सदर अस्पताल चतरा में उनका इलाज चल रहा था। 

गुरुवार को प्रात: 9:45 पर उन्होंने 85 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर जैसे ही इलाके में फैली उनके अंतिम दर्शन के लिए लोग सदर अस्पताल पहुंचे। जिला मुख्यालय स्थित उत्तरवाहिनी हेरू नदी श्मशान घाट पर देर शाम उनका अंतिम संस्कार हुआ। अंतिम संस्कार में काफी संख्या में लोग शामिल हुए।

विज्ञापन