पारंपरिक संस्कृति और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश
टीम एबीएन, रांची। आज रांची के मोरहाबादी मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक तक डहरे सोहराय पर्व के अवसर पर भव्य सांस्कृतिक यात्रा निकाली गयी। पारंपरिक नृत्य, संगीत, ढोल-नगाड़े और लोकगीतों के साथ निकली इस यात्रा में भारी संख्या में सांस्कृतिक प्रेमी शामिल हुए। अल्बर्ट एक्का चौक पर आयोजित सांस्कृतिक मंच कार्यक्रम में झारखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति की झलक देखने को मिली।
इस अवसर पर झारखंड केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष दिशुम वीर बाबू देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि सोहराय यानी बांधना पर्व झारखंड का लोक-सांस्कृतिक महापर्व है, जो पशुधन के प्रति कृतज्ञता और प्रकृति के साथ हमारे गहरे संबंध को दर्शाता है। इस पर्व में गाय, बैल, बकरी आदि पशुओं को स्नान कराकर सजाया जाता है, उनके सींगों में तेल-सिंदूर लगाया जाता है और ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक गीत-संगीत के माध्यम से उत्सव मनाया जाता है। गुड़ रोटी, शेलका रोटी और खापरा पीठा जैसे पारंपरिक पकवान भी इस पर्व की विशेष पहचान हैं।
सोहराय केवल पर्व नहीं, बल्कि झारखंड की पहचान, परंपरा, प्रकृति प्रेम और पशुधन के प्रति सम्मान का प्रतीक है। मौके पर महिपाल महतो, जगत पाल महतो, अजीत महतो, हरेंद्र महतो, ऋषि महतो, बसंत कुमार महतो, शीतल अखदार, किरण देवी, पार्वती देवी समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।