टीम एबीएन, रांची। गायत्री शक्तिपीठों, प्रज्ञापीठों, आनलाइन राष्ट्रीय स्वाध्याय एवं जप अनुष्ठान मंडलों के माध्यम से शरदपूर्णिमा के पावन अवसर पर शक्तिपीठ सेक्टर टू सहित कई प्रज्ञापीठ व मण्डलों, प्रखंडों, इकाइयों में अखंड जप एवं यज्ञीय अनुष्ठान विधान किये गए।शनिवार चाय बगान नामकुम स्थित पंचमुखी दिव्य हनुमान मंदिर में दीपयज्ञ किया गया।कल रविवार एवं आज सोमवार गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू में 5 कुण्डीय यज्ञ रणवीर व प्रमोद कुमार यज्ञ पुरोहित के सानिध्य में किए गए।
दीपयज्ञ में प्रखंड समन्वयक विजय कुमार,परिव्राजक प्रमोद कुमार एवं जिला समन्वयक जेएनपी के सानिध्य में तथा मंदिर पुजारी व समिति सदस्यगण के माध्यम से 108 दीपकों का दीपयज्ञ विधान हुआ। दीपयज्ञ विधान में गुरुवरश्रीपूज्यवर वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य की बतायी गयी।
ईश्वरीय चेतना की अवतार परम्परा पर ऋषि परम्परा और संस्कार परंपरा के पुनर्जागरण, साथ ही उपासना साधना सफल व सार्थक कैसे हो विषय पर प्रकाश डाला गया। पुरोहित प्रमोद कुमार ने बताया कि अपनी जीवन दिनचर्या में नित्य ईश्वरीय उपासना, साधना अनुष्ठान में ऊर्जा शक्ति बढ़ानी चाहिए और अपनी दोष दुर्गुण कषाय कलमषों का परिष्कार करना चाहिए।
कहा कि श्रेष्ठ कर्म - धर्म से मन निर्मल होता है साधना की ओर मन उन्मुख होता है।अपनी अर्जित जप तप की ऊर्जा शक्ति का श्रेष्ठ कर्म में नियोजित करना चाहिए। यज्ञ में बीके सिंह, सत्यानन्द सिन्हा, प्रेमलता दीदी, आशा, सुशीला, शान्ति आदि अनेक श्रद्धालु दीदियों ने सहयोग कर सफल बनाये।
यज्ञीय विधान उपरान्त सामान्य प्रसाद सहित ज्ञान प्रसाद में प्रज्ञा अभियान पाक्षिक, युग निर्माण व अखंड ज्योति पत्रिका तथा गायत्री माता का प्रतिमास्टीकर वितरित कर देव स्थापना कराया गया। आज पांच कुण्डीय महायज्ञ कराने वाले यजमान समूह ने यज्ञ साधकों को अमृताशन प्रसाद का भंडारा कराया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के विजय कुमार और जय नारायण प्रसाद ने दी।