- दशहरा सत्य, धर्म और सदाचार की विजय का महापर्व : संजय सर्राफ
एबीएन सोशल डेस्क। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा में दशहरा अथवा विजयादशमी का पर्व विशेष महत्त्व रखता है।
यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की विजय का संदेश देता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाता है। इस वर्ष विजयादशमी का पर्व 20 अक्टूबर दिन मंगलवार को मनाया जाएगा।
यह पर्व शारदीय नवरात्र के समापन के साथ देशभर में श्रद्धा, उत्साह और उल्लास से मनाया जाता है। रामायण के अनुसार लंकापति रावण ने माता सीता का हरण कर लिया था। माता सीता को रावण के बंधन से मुक्त कराने के लिए भगवान श्रीराम ने वानरराज सुग्रीव, हनुमानजी और वानर सेना के सहयोग से लंका पर चढ़ाई की।
युद्ध में भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर अधर्म का अंत किया और माता सीता को मुक्त कराया। इसी विजय की स्मृति में दशहरा मनाया जाता है।इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में रामलीला का मंचन होता है तथा रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है।
यह परंपरा मनुष्य को अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह और अन्य बुराइयों का त्याग करने की प्रेरणा देती है। दशहरा पर्व का संबंध मां दुर्गा की विजय से भी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महिषासुर नामक शक्तिशाली असुर के अत्याचारों से देवता और समस्त संसार त्रस्त थे। तब देवताओं की शक्तियों से मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ।
देवी ने नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया और दसवें दिन उसका संहार कर संसार को उसके आतंक से मुक्त कराया। इसी कारण विजयादशमी को शक्ति, साहस और धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। पश्चिम बंगाल सहित पूर्वी भारत के अनेक क्षेत्रों में यह पर्व दुर्गापूजा के समापन और मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ मनाया जाता है
विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम, मां दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। कई स्थानों पर शस्त्र पूजन, वाहन पूजन तथा औजारों की पूजा करने की परंपरा है। किसान अपनी कृषि सामग्री, व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों और कारीगर अपने उपकरणों का पूजन करते हैं।
शमी वृक्ष की पूजा भी इस दिन का एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। मान्यता है कि विजयादशमी पर नए कार्यों का शुभारंभ करना मंगलकारी होता है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में मेले, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। दशहरा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन और आत्मशुद्धि का अवसर भी है।
रावण के दस सिर मनुष्य के भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या, द्वेष और अन्य दुर्गुणों पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देते हैं। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा, त्याग, सत्य और आदर्श आचरण का संदेश देता है। यह पर्व समाज में प्रेम, सद्भाव, एकता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
दशहरा हमें सिखाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वालों की अंततः विजय होती है। इस पावन अवसर पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि अपने भीतर की बुराइयों का त्याग कर समाज में सदाचार, मानवता और सकारात्मकता का प्रसार करेंगे। यही विजयादशमी की वास्तविक सार्थकता और जीवन का सच्चा संदेश है।