एबीएन सोशल डेस्क (रांची)। गायत्री परिवार शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा शक्तिपीठ सेक्टर टू में चल रहे नौदिवसीय नवरात्र मंत्र जप अनुष्ठान, यज्ञीय अनुष्ठान विधान में आज चार कुण्डीय हवन यज्ञ हुआ। इस दौरान उपस्थित नवरात्र उपासक साधकों को शान्तिकुञ्ज के मार्गदर्शन में अच्छे विचार व अच्छे संस्कार के लिए प्रज्ञा प्रशिक्षण पाठशाला पर उद्बोधन किये गये।
यज्ञीय विधान दौरान कुछ साधक परिवार जनों के पुंसवन गर्भस्थ (शिशुदेव पूजन) संस्कार एवं जन्मदिवस संस्कार हुआ। दैनिक पूजा विधि, सामान्य व विशिष्ट अनुष्ठान प्रकरण में गायत्री महामंत्र का सस्वर पाठ, गुरु-ईश ध्यान वंदना, सरस्वती, व्यास वन्दना, पूजन सामग्री शुद्धिकरणम, षटकर्म, मंगलाचरणम् पवित्रीकरणम, आचमनम् शिखावनदनम, प्राणायाम, न्यासकरणम, पृथ्वी पूजनम, चन्दनधारणम संकल्प - धारणम, यज्ञोपवीतधारणम जीर्णोपवीतविसर्जनम, रक्षासूत्रम, कलश पूजनम एवं प्रार्थना, दीप पूजनम पश्चात देवावाहनम, षोडशोपचार पूजनम स्वस्तिवाचन पाठ, रक्षा विधान पर क्यों एवं कैसे के प्रथम चरण का पूजन- अर्चन पर आज चर्चा हुई।
नवरात्र महापर्व गायत्री साधना व यज्ञीय अनुष्ठान पर इसके नियम संयम और मंगलमय जीवन यापन की विशिष्ट तथ्यों पर ध्यान आकर्षित कर परम वंदनीया माताजी के लिखित व निर्दिष्ट गायत्री उपासना के प्रतिफल के कुछ बिंदुओं पर यज्ञ पुरोहित ने बताया कि दैवी शक्ति उपासना, पूजा तथा परमात्मा की उपासना साधना में निरन्तरता, नियमितता, तत्परता, त्याज्य व ग्राह्य विषयों पर ध्यान, शुद्ध आहार-विहार, विचार संयम, सत्संकल्प का पाठ अनुपालन, स्वाध्याय, चिन्तन मनन नैतिक चारित्रिक व्यवहार और उच्चस्तरीय आध्यात्मिक साधनाओं पर विचार विकास आदि संबन्धित लाभकारी व प्रभावकारी सूत्रों, बिंदुओं पर प्रकाश डालकर हवन-यज्ञ व संस्कार विधान विधिवत किये गये। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने दी।