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लोहरदगा : भंडरा के भिठा गांव में माता आदि शक्ति भवानी के लिए होती है अदृश्य भगवान की पूजा

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लोहरदगा : भंडरा के भिठा गांव में माता आदि शक्ति भवानी के लिए होती है अदृश्य भगवान की पूजा
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एबीएन न्यूज नेटवर्क, भंडरा, लोहरदगा। लोहरदगा जिले के भंडरा प्रखंड अन्तर्गत भिठा गांव में माता आदि शक्ति भवानी का एक ऐसा मंदिर है, जहां अदृश्य भगवान की पूजा की जाती है। मंदिर में भगवान नजर नहीं आते और न ही किसी ने इन्हें देखने की प्रयास की है। इस प्राचीन मंदिर का यह परंपरा करीब चार सौ साल पुरानी है। इसके पीछे की मान्यताएं भी किसी को ज्ञात नहीं है।

गांव के इस मंदिर में परंपरागत शाहदेव परिवार के सदस्य ही पूजा अर्चना करते हैं। लेकिन भगवान को देखने या छूने का अधिकार किसी को नहीं है। बताया जाता है कि भगवान की दस भुजी मूर्तियां एक मंजूषा में बंद है। यह मंजूषा एक बक्से में बंद है। जिसे कपड़ों की गठरी में रखा गया है।

परिवार के बुजुर्ग बताते हैं कि पूर्वजों द्वारा आंखों में पट्टी बांध कर प्रत्येक दशहरा भगवान को स्नान कराया जाता है। करीब चार सौ साल पहले इस मंदिर की स्थापना लाल भीम नाथ शाहदेव ने की थी। इनके वंशज लाल नवीन किशोर नाथ शाहदेव के पश्चात वर्तमान में लाल राजकिशोर नाथ शाहदेव मंदिर के पुजारी हैं। 

लाल नवीन किशोर ने बताया कि परिवार के मुखिया द्वारा ही आंखों में पट्टी बांध कर दुर्गा पूजा के समय भगवती का स्नान कराया जाता है और इसी स्थिति में पूजा की जाती है। पूर्वजों द्वारा छोड़े गये दस्तावेज में ही मंदिर में दस भुजी माता भवानी की मूर्ति होने की बात कही गई है। लेकिन किसी ने इसे खुली आंखों से नहीं देखा है। साल में एक बार नवरात्रि के समय जब विशेष पूजा अर्चना की जाती है। 

उस वक्त छूने से माता भवानी मूर्ति के दस भुजी होने की अनुभूति होती है। परंपरा को अबतक सभी निभाते आ रहे हैं। भगवान को स्नान कराने का यह परंपरा 1952 तक जारी था। शाहदेव परिवार के वंशज लाल मनीन्द्र नाथ शाहदेव द्वारा 1952 में अंतिम बार भगवान को स्नान कराया गया था। 

तब मंदिर में सप्तमी से नवमी तक पूजा होता था। 1952 के बाद सिर्फ नवमी के दिन दशहरा का पूजा होता है। परंपरा के अनुसार उस दिन महिष बलि भी दी जाती है। इस मंदिर की मान्यताएं भी काफी प्राचीन हैं। लोगों ने बताया कि मंदिर में अभी भी लोगों की मान्यताएं पूरी होती है।

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