एबीएन सोशल डेस्क (रांची)। गायत्री परिवार शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा यज्ञीय अनुष्ठान विधान में दो कुंडीय यज्ञ आज किया गया। इस दौरान उपस्थित नवरात्र उपासक साधकों को नवरात्र महापर्व गायत्री साधना व यज्ञीय अनुष्ठान पर इसके नियम संयम और मंगलमय जीवन यापन की विशिष्ट तथ्यों पर ध्यान आकर्षित कर बताया कि वर्ष में दो बार आने वाला यह नवरात्र पर्व साधना आत्मिक शुद्धि का विशेष अवसर माना गया है। शारदीय नवरात्र एवं वसन्त नवरात्र दोनों ही काल उपासना,साधना के लिए श्रेष्ठ माने जाते हैं।
इन दिनों में तन मन, विचार, व्यवहार, भावनाओं को बहुत शुद्ध, पवित्र, नियमित, सादगी, सात्विक, संयमित और संतुलित करने का प्रबल प्रयास व पुरुषार्थ करना होता है। इससे शारीरिक, मानसिक व आत्मिक ऊर्जा बल वृद्धि होती है इसमें 9 दिनों की तपश्चर्या अनुष्ठान से सूक्ष्म दिव्य अनुदानों की कृपा, वर्षा साधक पर होती है।
इसमें साधक का व्यक्तित्व परिष्कृत होता है। इससे पाप-ताप, अभिशाप, दुख कष्ट का क्षरण, निवारण होता है, तृप्ति तुष्टि और शान्ति प्राप्त होती है। इसमें अनुष्ठान काल में कुछ अनिवार्य व विशिष्ट नियम संयम और आहार-विहार, मानसिक, शारीरिक रूप से परिष्कृत वातावरण का अनुसरण करना होता है।
परम पूज्य गुरुदेवश्री के अनुसार इस अवधि में आध्यात्मिक सत्संग, स्वाध्याय, दैनिक हवन-यज्ञ आयोजन क्रम जीवनचर्या को सार्थक बनाते हैं। फिर पावन बना दो हे देव सविता की स्तुति साथ एक पाली का अग्निहोत्र किया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार रांची के जय नारायण प्रसाद ने दी।