हवन-यज्ञ के दौरान संस्कार, गायत्री की दैनिक उपासना एवं नवरात्र में लघु अनुष्ठान साधना की महत्ता पर चर्चा हुई
एबीएन सोशल डेस्क, रांची। गायत्री शक्तिपीठ धुर्वा सेक्टर टू में शारदीय नवरात्र साधना अनुष्ठान महापर्व में आज दूसरे दिन दो कुण्डीय यज्ञ व दो संस्कार कराये गये। एक नामकरण और दूसरा अन्नप्राशन संस्कार वरण किये गये। यज्ञीय विधान दौरान गायत्री की दैनिक उपासना एवं नवरात्र काल में लघु साधना अनुष्ठान पर चर्चा की गयी।
कर्मकांड मध्य संस्कार प्रकरण संबंधित एक प्रज्ञागीत पुरोहित प्रमोद कुमार ने सुनाया। मौके पर बताया गया कि परमात्म सत्ता के अवतरण, गायत्री महामंत्र की साधना, यज्ञीय अनुष्ठान की महत्ता व आवश्यकता, सदुपयोगिता, गुरुवर श्रीपूज्यवर वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा घोषित 21 सदी उज्जवल भविष्य, नारी सदी, युगनिर्माण योजना, विचार क्रांति अभियान विस्तार पर संक्षिप्त प्रकाश डाला गया।
गुरुदेव श्रीप्रज्ञावतार की वाणी, लेखनी व योजना में चर्चा कर जेएनपी ने बताया कि अध्यात्म विज्ञान का क्षेत्र बड़ा विशाल है। इस क्षेत्र में गायत्री महामंत्र की महत्ता महिमा सर्वोपरि और सर्व हितकारी है। इस महामंत्र की उपासना सर्वश्रेष्ठ है। नवरात्र में इसकी विशिष्ट उपासना साधना अनुष्ठान एक स्वर्णिम अवसर है।
यज्ञीय विधान में यज्ञ की उष्मा का मनुष्य के अंत:करण पर, भूमि व मानवीय हृदय-अंतराल के सुसंस्कारों पर प्रभाव पर प्रकाश डालकर दो संस्कार नामकरण व अन्नप्राशन विधान किये गये। शिशु में शिष्टता, शालीनता, स्फूर्ति, तेजस्विता, कर्तव्यनिष्ठा धर्मशील प्रगतिशीलता, सुपात्रता, अन्न के पूर्व संस्कार निवारण और सात्विक सुसंस्कारों की स्थापना पर प्रकाश डालकर संकल्प कराकर यज्ञीय विधान से कर्मकाण्ड कराया गया।
यज्ञीय विधान के अंत में सबके लिए स्वस्थ-सुखद जीवन व उज्जवल भविष्य की मंगलमय वंदना कर शान्ति-पाठ की गयी। उक्त जानकारी गायत्री परिवार, रांची के प्रमोद कुमार और जय नारायण प्रसाद ने दी।