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शक्ति की आराधना का महापर्व है शारदीय नवरात्रि

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शक्ति की आराधना का महापर्व है शारदीय नवरात्रि
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  • शक्ति की आराधना का महापर्व है शारदीय नवरात्रि
  • यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म तथा अन्याय पर न्याय की विजय का देता है संदेश : संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत की सनातन संस्कृति में नवरात्रि का पर्व आस्था, भक्ति, शक्ति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। मां दुर्गा की आराधना को समर्पित यह पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष में शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ रविवार 11 अक्टूबर से होगा और 19 अक्टूबर तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। 20 अक्टूबर को विजयादशमी अर्थात दशहरा मनाया जाएगा।

 नवरात्रि के दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, दुर्गा सप्तशती का पाठ, भजन-कीर्तन, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।नवरात्रि का शाब्दिक अर्थ है नौ रातें। यह पर्व शक्ति की अधिष्ठात्री देवी मां दुर्गा को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब महिषासुर नामक राक्षस के अत्याचारों से देवता और समस्त संसार त्रस्त हो गए, तब देवताओं की सामूहिक शक्ति से मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ। मां दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध कर संसार को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया। 

इसी विजय की स्मृति में नवरात्रि मनाई जाती है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म तथा अन्याय पर न्याय की विजय का संदेश देता है। नवरात्रि का संबंध भगवान श्रीराम की विजय गाथा से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए मां दुर्गा की आराधना की थी। विजयादशमी के दिन रावण पर उनकी विजय को धर्म की अधर्म पर जीत के रूप में मनाया जाता है।

 नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। प्रथम दिन मां शैलपुत्री, द्वितीय दिन मां ब्रह्मचारिणी, तृतीय दिन मां चंद्रघंटा, चतुर्थ दिन मां कूष्मांडा, पंचम दिन मां स्कंदमाता, षष्ठम दिन मां कात्यायनी, सप्तम दिन मां कालरात्रि, अष्टम दिन मां महागौरी और नवम दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना होती है।मां के प्रत्येक स्वरूप का अपना विशिष्ट आध्यात्मिक महत्त्व है। 

मां शैलपुत्री दृढ़ता, ब्रह्मचारिणी तपस्या, चंद्रघंटा साहस, कूष्मांडा सृजन शक्ति, स्कंदमाता वात्सल्य, कात्यायनी पराक्रम, कालरात्रि निर्भयता, महागौरी पवित्रता और सिद्धिदात्री सिद्धि एवं पूर्णता की प्रतीक मानी जाती हैं। इन स्वरूपों की आराधना से भक्तों को आत्मबल, सकारात्मकता और सदाचार की प्रेरणा मिलती है।नवरात्रि के प्रथम दिन घरों और मंदिरों में विधि-विधान से घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है।

 इसके साथ ही नौ दिनों तक चलने वाली देवी आराधना का आरंभ होता है। भक्त प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं, पूजा स्थल को सजाते हैं और मां दुर्गा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्प, फल, नैवेद्य तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। अनेक श्रद्धालु नौ दिनों तक उपवास रखते हैं और दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा तथा देवी मंत्रों का पाठ करते हैं।नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्त्व है।

इन दिनों अनेक परिवारों में कन्या पूजन किया जाता है। छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है तथा भोजन कराकर दक्षिणा और उपहार दिए जाते हैं। यह परंपरा नारी शक्ति के सम्मान और समाज में बालिकाओं के महत्त्व को रेखांकित करती है।नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता का भी उत्सव है।

 गुजरात में गरबा और डांडिया, पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा तथा देश के विभिन्न भागों में देवी जागरण, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। मंदिरों और पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है तथा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।इस पर्व का उद्देश्य मनुष्य के भीतर निहित नकारात्मक विचारों, अहंकार, क्रोध, लोभ और अन्य बुराइयों पर विजय प्राप्त करना भी है।

 मां दुर्गा की उपासना हमें साहस, संयम, करुणा, आत्मविश्वास और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। शारदीय नवरात्रि हमें स्मरण कराती है कि शक्ति का वास्तविक स्वरूप केवल बाहुबल में नहीं, बल्कि सत्य, सदाचार, धैर्य और आत्मविश्वास में निहित है। मां दुर्गा की आराधना के माध्यम से समाज में नारी सम्मान, सेवा, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए।

नवरात्रि का यह पावन पर्व प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर की बुराइयों को त्यागकर अच्छाइयों को अपनाने तथा समाज और राष्ट्र के कल्याण में योगदान देने की प्रेरणा देता है। मां दुर्गा से यही प्रार्थना है कि उनकी कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य का वास हो तथा समस्त संसार में प्रेम, सद्भाव और मंगल का प्रकाश फैले।

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