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नवरात्र के संधि बेला का आगमन...

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नवरात्र के संधि बेला का आगमन...
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  • नवरात्र के संधि बेला का आगमन... 

त्रिवेणी दास

कल से अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवरात्र का संधि-बेला (संध्या काल) का शुभारंभ हो रहा है। ग्रीष्म ऋतु का विदाई हो रहा है और शरद ऋतु का आगमन हो रहा है और यह जो मध्यकाल है वह सनातन आध्यात्मिक उपासना, साधना एवं आराधना के लिए अत्यंत उपयुक्त एवं प्रभावकारी परिणाम देने वाला काल है। प्रतिदिन के त्रिकाल संध्या अध्यात्म विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण तो है ही, परंतु यह 9 दोनों का काल अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इन 9 दिनों में संपूर्ण व्यक्तित्व का परिमार्जन एवं परिशोधन किया जाता है। शक्ति की विभिन्न स्वरूपों के अधिष्ठात्री देवियों (फिजिक्स साइंस के अनुसार शक्ति के 8 स्वरूप होते हैं और आपस में इंटरचेंजेबल भी होते हैं) से सानिध्य तथा संपर्क साधते हुए उनकी शक्ति रुपी आशीर्वाद एवं वरदान प्राप्त किया जाता है।

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यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि का अवलंबन करते हुए 9 दिनों का संकल्प-अनुष्ठान किया जाता है। दशहरा का दिन हवन करते हुए अनुष्ठान पूर्ण किया जाता है और उत्सव, त्यौहार, पर्व एवं समारोह मनाते हुए एक दूसरे का अभिवादन तथा शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते हुए आनंद में विभोर हुआ जाता है। 

नवरात्रि में ब्रह्मांड के प्रकृति में सूक्ष्म एवं अदृश्य स्वरूप में विद्यमान शक्ति (शक्ति अदृश्य होती है) का अनुदान हर किसी को प्राप्त करना चाहिए जिसके आधार पर जीवन में विशेष पुरुषार्थ किया जा सके। 

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