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मृत्यु अनंत जीवन श्रृंखला की एक कड़ी है : पुरोहित

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मृत्यु अनंत जीवन श्रृंखला की एक कड़ी है : पुरोहित
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  • मृत्यु अनंत जीवन श्रृंखला की एक कड़ी है : पुरोहित
  • मरणोत्तर संस्कार, श्राद्ध संस्कार, तर्पण की महत्ता पर विशेषज्ञों ने डाला प्रकाश 

टीम एबीएन, रांची। गायत्री शक्तिपीठ धूर्वा सेक्टर टू में  इन दिनों आश्विन कृष्ण पक्ष, पितृ पक्ष में श्राद्ध संस्कार विधान विधिवत सुबह दस बजे से प्रति दिन दिव्य वातावरण में संचालित हो रहा है। 

पीठ परिसर में पीठ की ओर से परिजनों के लिए नि:शुल्क अधिकाधिक पूजन-अर्चन सामग्री की सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी हैं। दो भाग में श्राद्ध संस्कार हो रहे हैं। एक भाग  में परिजन केवल तर्पण कराते हैं,दूसरे भाग में तर्पण के साथ पिंडदान भी विधिवत कराते हैं। 

मरणोत्तर संस्कार प्रकरण में  चर्चा कर बताया गया कि भारतीय संस्कृति में यह तथ्य है कि मृत्यु के साथ जीवन समाप्त नहीं होता। अनंत जीवन श्रृंखला की एक कड़ी मृत्यु भी है। मरणोत्तर संस्कार को श्राद्धकर्म भी कहते हैं। 
प्रारंभ व विधान बीच में एक दो संबन्धित प्रज्ञागीत गायन भी किया गया। षट्कर्म व संकल्प कराकर इस संस्कार के विशेष उपचार कराये गये। 

जीवन मृत्यु चक्र का अनुशासन बनाये रखने वाले तंत्र के अधिष्ठाता यम देवता तथा पितर पूर्वजों का आवाहन नमन वंदन व पूजन-अर्चन विधिवत यम स्तोत्र व मंत्र सस्वर पाठ किया गया। फिर तर्पण व पिंडदान विधान पर महत्ता पर प्रकाश डालकर विधान किये गये। अंत में दिवंगत आत्मा की सद्गति, शान्ति व कल्याण के लिए वंदना प्रार्थना पाठ किया गया। 

दूर दूर से परिजन रोज आते हैं। इस वर्ष में आज प्रथम बार तर्पण और पिंडदान विधान के लिए महेश्वर कुमार साहनी उपस्थित हुए थे,उन्होनें कर्मकाण्ड विधान पर चर्चा करते हुए अपनी सहजता व संतुष्टि बतायी। उक्त जानकारी गायत्री परिवार, रांची के जय नारायण प्रसाद ने दी।

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