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रुक्मिणी विवाह से सुदामा चरित्र तक गूंजा भक्ति का स्वर, श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति

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रुक्मिणी विवाह से सुदामा चरित्र तक गूंजा भक्ति का स्वर, श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति
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  • रुक्मिणी विवाह से सुदामा चरित्र तक गूंजा भक्ति का स्वर, श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति
  • सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का हुआ समापन
  • सच्ची भक्ति में श्रद्धा, विश्वास और पूर्ण समर्पण का है विशेष महत्व: साध्वी गोपिका जी

एबीएन सोशल डेस्क। डॉ संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा रांची के पुंदाग स्थित श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्री राधाष्टमी महोत्सव के अवसर पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शनिवार को श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ समापन हुआ। कथा के सप्तम एवं अंतिम दिवस वृंदावन की सुप्रसिद्ध कथा वाचिका साध्वी गोपिका जी ने श्री रुक्मिणी विवाह, कंस उद्धार तथा भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अद्भुत मित्रता के प्रसंगों का भावपूर्ण एवं विस्तृत वर्णन किया।

कथा के दौरान साध्वी गोपिका जी ने बताया कि रुक्मिणी जी ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य एवं पति मानकर पूर्ण समर्पण भाव से उनका स्मरण किया। भगवान श्रीकृष्ण ने भक्त की पुकार स्वीकार करते हुए रुक्मिणी जी का हरण कर उनसे विवाह किया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि सच्ची भक्ति में श्रद्धा, विश्वास और पूर्ण समर्पण का विशेष महत्व है। 

इसके पश्चात कंस उद्धार का प्रसंग सुनाते हुए साध्वी गोपिका जी ने भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा आगमन तथा अत्याचार के प्रतीक कंस के अंत का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब अधर्म बढ़ता है, तब धर्म की स्थापना के लिए ईश्वर का अवतार होता है। इसके बाद श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता का मार्मिक प्रसंग प्रस्तुत करते हुए उन्होंने मित्रता में प्रेम, समानता, आत्मीयता और निस्वार्थ भाव की महत्ता बताई।

 निर्धन सुदामा के प्रति भगवान श्रीकृष्ण का प्रेम यह संदेश देता है कि सच्ची मित्रता धन-दौलत और पद-प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि हृदय के भाव से जुड़ी होती है। सभी प्रसंगों के दौरान प्रस्तुत की गई सजीव झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। साध्वी गोपिका जी के सुमधुर श्री राधा-कृष्ण भजनों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिरस में डूब गया। भजनों के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाते रहे। 

श्री राधा रानी श्यामा जी का वृंदावन से मंगाए गए जड़ित आभूषणों से अत्यंत आकर्षक एवं मनोहारी श्रृंगार किया गया, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया। कथा के समापन पर श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ की विधिवत पूर्णाहुति हुई। इसके पश्चात सामूहिक आरती की गई तथा श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। भारी बारिश के बावजूद अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए मंदिर पहुंचे। 

ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने कथा वाचिका साध्वी गोपिका जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मुखारविंद से सात दिनों तक श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की भावनाओं को देखते हुए अगले वर्ष भी साध्वी गोपिका जी से श्रीमद्भागवत कथा कराने का प्रयास किया जाएगा। 

इस अवसर पर डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान,अरविंद अग्रवाल, विजय अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल,पूरणमल सर्राफ, निर्मल छावनिका, नंदकिशोर चौधरी,अंजनी अग्रवाल, सुरेश भगत, मधुसूदन जाजोदिया, संजय सर्राफ, पवन पोद्दार, दिलीप अग्रवाल,शिव भगवान अग्रवाल,श्याम सुंदर गोयल, ज्ञान प्रकाश शर्मा, विष्णु सोनी, मनीष सोनी, विशाल जालान, विद्या देवी अग्रवाल, बिमला जालान, सुनीता अग्रवाल, संतोष देवी अग्रवाल, उर्मिला पाड़िया, दीक्षा अग्रवाल, शकुंतला केजरीवाल, सरिता अग्रवाल, सुमन चौधरी,रमा देवी डोकानिया, आशा मुंजाल, अमिता जालान, दीपिका मोतिका,नीलम गोयल, नंदरानी पाठक, आशा सिंह, उषा मोदी,ललिता पोद्दार, किरण पोद्दार, शोभा अग्रवाल, इंदू पोद्दार,लाल देवी, किरण बरनवाल, नंद रानी पाठक, सुनीता देवी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला-पुरुष उपस्थित थे।

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