करमा पूर्व संध्या पर झारखंड में दिखी लोक संस्कृति की रंगत
टीम एबीएन, रांची। प्रकृति और संस्कृति के महापर्व करमा की पूर्व संध्या पर सोमवार को झारखंड के विभिन्न हिस्सों में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। रांची समेत राज्य के कई स्थानों पर अखरा, कॉलेजों और सांस्कृतिक मंचों को विशेष रूप से सजाया गया। देर शाम तक ढोल-नगाड़ों और मांदर की थाप पर पारंपरिक नृत्य-गान का दौर चलता रहा। 22 सितंबर को मुख्य करम पूजा मनायी जायेगी।
करमा पूर्व संध्या के कार्यक्रमों में झारखंड की समृद्ध लोक और जनजातीय संस्कृति की झलक देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों और छात्र-छात्राओं ने मांदर, ढोल और बांसुरी की धुन पर सामूहिक करमा नृत्य की प्रस्तुति दी। गीत-संगीत और नृत्य के बीच पूरा माहौल उत्सवमय नजर आया।
कार्यक्रमों में कुड़ुख, मुंडारी, हो, संथाली, नागपुरी और खोरठा सहित विभिन्न क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं में पारंपरिक करम गीत प्रस्तुत किये गये। इन गीतों के जरिए प्रकृति, सामाजिक परंपराओं और भाई-बहन के रिश्ते से जुड़े भावों को अभिव्यक्त किया गया। युवा पीढ़ी ने भी पूरे उत्साह के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में हिस्सा लिया।