श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव का हुआ शुभारंभ
एबीएन सोशल डेस्क। सराफ परिवार के तत्वावधान में महाराजा अग्रसेन भवन, रांची में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव का भव्य एवं भक्तिमय शुभारंभ हुआ। आयोजन के प्रथम दिवस श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कथा के शुभारंभ से पूर्व प्रात: 10 बजे लक्ष्मी नारायण मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली गयी।
कलश यात्रा में सैकड़ों महिलाएं एवं पुरुष राजस्थानी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर पूरे उत्साह एवं श्रद्धा के साथ यात्रा में भाग लिया। कलश यात्रा में जगन्नाथधाम के सुप्रसिद्ध कथावाचक एवं व्यास श्री दिनेश जी भारद्वाज सुसज्जित रथ पर विराजमान होकर शामिल हुए। श्रद्धालुओं के जयघोष, भजन एवं मंगलगीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
कलश यात्रा के कथा स्थल पर पहुंचने के बाद विधिवत पूजा-अर्चना के साथ श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया।कथा के प्रथम दिवस व्यास श्री दिनेश जी भारद्वाज ने श्रीमद्भागवत कथा के महात्म्य तथा शुकदेव-परीक्षित मिलन के अत्यंत भावपूर्ण प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को भक्ति, ज्ञान, संस्कार, सदाचार और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला दिव्य ग्रंथ है।
इसके श्रवण से मनुष्य के अंतर्मन में सकारात्मक विचारों का संचार होता है तथा जीवन को नई दिशा मिलती है। शुकदेव जी और राजा परीक्षित के मिलन के प्रसंग का व्यास जी ने अत्यंत प्रभावशाली एवं सजीव चित्रण प्रस्तुत किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। व्यास जी के ओजस्वी प्रवचन के साथ प्रस्तुत किए गए सुमधुर भजनों ने कथा परिसर को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग से कथा का श्रवण किया। कथा के समापन पर सामूहिक आरती की गयी तथा श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि कथा के द्वितीय दिवस मंगलाचरण, शुकदेव जी के जन्म एवं पूजन तथा राजा परीक्षित के जन्म से जुड़े भक्तिमय एवं प्रेरणादायक प्रसंगों का वर्णन व्यास श्री दिनेश जी भारद्वाज द्वारा किया जायेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कथा में उपस्थित होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया।
मौके पर दयानंद सर्राफ, सीताराम सर्राफ, श्री गोपाल सर्राफ, ओम सर्राफ, गिरधारी सर्राफ, पवन सर्राफ, भगवान सर्राफ, प्रदीप सर्राफ, संजय सर्राफ, दिलीप सर्राफ, संदीप सर्राफ, विक्की सर्राफ, विक्रांत सर्राफ, मनोज चौधरी, सज्जन पाड़िया, राजेंद्र अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। कथा स्थल पर पूरे दिन भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बना रहा।