एबीएन सोशल डेस्क। पर्युषण पर्व का दुसरा दिन सुबह 7.30 बजे स्नात्र पुजा का 4.30 बजे से प्रवचन हुआ जिसमें पर्युषण का महत्व एवं पर्युषण के कर्तव्यों के बारे में बताया गया।
क्षमापना के बारे में कहा गया है कि जिससे भी साल भर में आपका कोई बेर या मनमुटाव हुआ है, उससे भी स्वयं जाकर शुद्ध हृदय से क्षमायाचना करे एवं उसे शुद्ध क्षमा भी प्रदान करें। चंदनबाला और मृगावती-का क्षमापना पर उदाहरण भी दिया।
अष्टम तप का पर्युषण में विशेष महत्व होता है तीन दिन उपवास करना या अलग अलग तीन दिनो तक उपवास करना, तप करके सिर्फ भूखा ही नहीं रहना है, तप करके दिखावा (माया) नहीं करना है, तप करके धन-धान्य और भौतिक सुख की कामना करने से तप व्यर्थ हो जाता है, मिथ्यात्व तप अपने धर्म के प्रति कभी शंशय नहीं करना चाहिए।
पर्युषण मे चेत्य परिपाटी का विशेष महत्व बताया गया। आगे बताया कि जितने जिन मंदिर है, एक मंदिर से दूसरे मंदिर तक गाजा बाजा आदि के साथ धूमधाम से जाना चाहिए। श्रावक के वर्ष भर में करने वाले 11 कर्तव्यों के वारे मे विस्तार पूर्वक बताया।
आज उपस्थित लोगो में दिनेश भाई सेठ, सुभाष बोथरा, धर्म चन्द,रिखब चन्द भंसाली, अनिल कोठारी, शशी कोठारी, प्रभा बोथरा, प्रेमलता नाहटा, उषा कोठारी, सुमन जैन आदि उपस्थित थे। उक्त जानकारी प्रमोद बोथरा ने दी।