बाबाधाम की ओर बढ़ते कदम
एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि श्रावण मास हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण महीना माना जाता है। इस पूरे माह शिवालयों में हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष गूंजते हैं।
देशभर से लाखों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए कांवर यात्रा पर निकलते हैं। झारखंड स्थित देवघर का प्रसिद्ध बैद्यनाथ धाम देश के प्रमुख शिव तीर्थों में विशेष स्थान रखता है। यहां सावन में होने वाली कांवर यात्रा आस्था, भक्ति, तपस्या और श्रद्धा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करती है। कांवर यात्रा में श्रद्धालु पवित्र नदियों और जलस्रोतों से जल भरकर उसे कांवर में लेकर भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग पर अर्पित करते हैं।
झारखंड में सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर लगभग 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं। मान्यता है कि सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर बाबा बैद्यनाथ का अभिषेक करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कांवरिया इस यात्रा के दौरान कठिन नियमों और संयम का पालन करते हुए निरंतर बोल बम का जयघोष करते हैं।
श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। विष की उष्णता को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इसी परंपरा से सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की धार्मिक मान्यता जुड़ी मानी जाती है।सावन के प्रत्येक सोमवार का विशेष महत्व होता है।
श्रद्धालु उपवास रखते हैं, शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। ॐ नम: शिवाय का जाप करते हुए भक्त भगवान शिव से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं। देवघर का बैद्यनाथ धाम भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है।
यहां भगवान शिव बैद्यनाथ या बाबा बैद्यनाथ के नाम से पूजे जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। शिव की आराधना और रावण से जुड़ी पौराणिक कथा के कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। सावन में बाबा बैद्यनाथ मंदिर में दर्शन और जलाभिषेक के लिए देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
कांवरियों की लंबी कतारें, भगवा वस्त्र, हाथों में कांवर और चारों ओर गूंजता बोल बम का उद्घोष वातावरण को पूरी तरह शिवमय बना देता है।कांवर यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम, त्याग और आत्मअनुशासन की यात्रा भी है। अनेक कांवरिया नंगे पैर लंबी दूरी तय करते हैं। वे यात्रा के दौरान सात्त्विक भोजन करते हैं और अपने आचरण में पवित्रता बनाए रखने का प्रयास करते हैं।
रास्ते में विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं द्वारा कांवरियों के लिए भोजन, पानी, चिकित्सा, विश्राम और अन्य सेवाओं की व्यवस्था की जाती है। सावन और कांवर यात्रा धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का भी संदेश देती है। यात्रा के दौरान जाति, भाषा, क्षेत्र और आर्थिक स्थिति का भेद मिट जाता है और सभी श्रद्धालु एक ही पहचान- बोल बम के साथ आगे बढ़ते हैं।
सेवा शिविरों में स्थानीय लोग कांवरियों की सेवा को पुण्य कार्य मानकर सहयोग करते हैं। भगवान शिव की उपासना हमें त्याग, करुणा, धैर्य, संयम और लोककल्याण की प्रेरणा देती है। शिव स्वयं विष को धारण कर संसार की रक्षा करने वाले देव माने जाते हैं। इसलिए सावन की आराधना केवल मंदिर में पूजा करने तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन में शिव के आदर्शों को अपनाने का अवसर भी है।
सावन में बैद्यनाथ धाम की कांवर यात्रा श्रद्धा और साधना की ऐसी जीवंत परंपरा है, जिसमें भक्त कठिन मार्ग को भी आनंदपूर्वक स्वीकार करते हुए बाबा के दरबार तक पहुंचता है। गंगाजल की एक-एक बूंद और हर-हर महादेव का प्रत्येक जयघोष भक्त और भगवान के बीच आस्था के अटूट संबंध का प्रतीक बन जाता है। यही कारण है कि सावन आते ही संपूर्ण देवघर नगरी भक्ति, विश्वास और शिवमय ऊर्जा से भर उठती है।