Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
समाज

देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु के योगनिद्रा में प्रवेश का पावन पर्व

शेयर करें: WhatsApp Facebook X
देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु के योगनिद्रा में प्रवेश का पावन पर्व
विज्ञापन
  • देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु के योगनिद्रा में प्रवेश का पावन पर्व
  • आत्म चिंतन,आस्था, संयम और साधना का देता है संदेश : संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि देवशयनी एकादशी जिसे हरिशयनी एकादशी, आषाढ़ी एकादशी अथवा पद्मा एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक है। इस वर्ष देवशयनी एकादशी 25 जुलाई दिन शनिवार को मनाई जाएगी। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर आने वाला यह पर्व भगवान श्रीहरि विष्णु के क्षीरसागर में चार माह की योगनिद्रा में प्रवेश का प्रतीक माना जाता है। 

इसी दिन से चातुर्मास का शुभारंभ होता है, जो कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) तक चलता है। धार्मिक मान्यताओं केअनुसार देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर योगनिद्रा में चले जाते हैं।इस अवधि में मांगलिक एवं वैवाहिक कार्य सामान्यतः स्थगित कर दिए जाते हैं तथा साधना, जप, तप, व्रत, दान, सत्संग और सेवा जैसे आध्यात्मिक कार्यों का विशेष महत्व बढ़ जाता है। 

मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने, भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने तथा गरीबों एवं जरूरतमंदों की सेवा करने से मनुष्य को पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।देवशयनी एकादशी का उल्लेख पद्म पुराण, स्कंद पुराण तथा भविष्योत्तर पुराण सहित अनेक धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। 

इन ग्रंथों के अनुसार यह व्रत पापों का नाश करने वाला, मन को पवित्र बनाने वाला तथा मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। इस दिन प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु का पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप एवं नैवेद्य से पूजन किया जाता है। श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता तथा विष्णु मंत्रों का जप करते हैं और रात्रि में भजन-कीर्तन एवं जागरण का आयोजन भी करते हैं।

इस एकादशी का मूल उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सदाचार, सेवा, करुणा और आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होना है। चातुर्मास के दौरान व्यक्ति अपने आचरण में पवित्रता, सादगी और अनुशासन अपनाने का संकल्प लेता है। यह पर्व प्रकृति संरक्षण, जीवों के प्रति दया, सात्विक जीवनशैली तथा सामाजिक समरसता का भी संदेश देता है। 

आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में देवशयनी एकादशी हमें आत्मचिंतन, संयम और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा का संदेश देती है। यह पर्व बताता है कि भौतिक उन्नति के साथ आध्यात्मिक विकास भी उतना ही आवश्यक है। श्रद्धा, भक्ति और सेवा के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बनाकर समाज में प्रेम,सद्भाव और सकारात्मकता का संचार कर सकता है।

विज्ञापन

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.

कुल पाठक (Total Visitors): 32,317